Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव अब औपचारिक रूप लेने जा रहा है। लंबे समय बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी नई सरकार के गठन की तैयारी में जुट गई है। पार्टी ने 9 मई को नए मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की है। खास बात यह है कि यह समारोह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के दिन आयोजित किया जाएगा, जिससे इसे राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों नजरिए से अहम माना जा रहा है।
टैगोर जयंती के दिन शपथ ग्रहण का खास संदेश
9 मई को रवींद्रनाथ टैगोर जयंती मनाई जाती है, जिसे बंगाल में बेहद सम्मान और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भाजपा ने इसी दिन शपथ ग्रहण समारोह रखकर बंगाल की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का संदेश देने की कोशिश की है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के साथ नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत का प्रतीक भी है।
पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार में दिया था संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान ही इस तारीख का संकेत दिया था। अपनी अंतिम चुनावी सभा में उन्होंने कहा था कि चुनाव नतीजों के बाद वह फिर बंगाल आएंगे और नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे।
अब भाजपा की जीत के बाद यह बयान राजनीतिक रूप से और ज्यादा अहम माना जा रहा है।
चुनाव आयोग करेगा औपचारिक प्रक्रिया पूरी
नई सरकार के गठन से पहले चुनाव आयोग की औपचारिक प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी कोलकाता पहुंचकर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नतीजों की आधिकारिक अधिसूचना सौंपेंगे।
इसके बाद राज्यपाल को औपचारिक जानकारी दी जाएगी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मौजूदा मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा जाएगा।
कार्यवाहक सरकार की भूमिका भी अहम
सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार के शपथ ग्रहण तक मौजूदा सरकार को कार्यवाहक सरकार के रूप में जिम्मेदारी निभाने के लिए कहा जा सकता है, ताकि प्रशासनिक कामकाज में कोई रुकावट न आए।यह प्रक्रिया राज्य में सत्ता हस्तांतरण को सुचारु और संवैधानिक तरीके से पूरा करने का हिस्सा होगी।
बंगाल की राजनीति में नया अध्याय
चार दशकों से अधिक समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के शासन के बाद भाजपा का सत्ता में आना राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसे केवल सरकार बदलने के तौर पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।9 मई का शपथ ग्रहण समारोह अब सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बंगाल के भविष्य की नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

