Lucknow News: लखनऊ की सेंट्रल बार एसोसिएशन से जुड़ा विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का पंजीकरण लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। इस फैसले के बाद दोनों अधिवक्ता फिलहाल किसी भी न्यायालय में वकील के रूप में पेश नहीं हो सकेंगे। शनिवार, 26 सितंबर 2026 को अनुशासन समिति ने सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी।
बार काउंसिल ने क्यों निलंबित किया लाइसेंस?
इस पूरे मामले की शुरुआत सेंट्रल बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर हुए विवाद से हुई। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने 23 अगस्त 2026 को अपनी सामान्य बैठक में प्रस्ताव पारित किया था। इसमें परमानंद श्रीवास्तव को सेंट्रल बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी का अध्यक्ष घोषित किया गया था।
इसके साथ ही एक महीने के भीतर एसोसिएशन का चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था। चुनाव की प्रक्रिया की निगरानी के लिए बार काउंसिल के पांच सदस्यों को पर्यवेक्षक भी बनाया गया था।
प्रस्ताव खारिज करने का लगा आरोप
बार काउंसिल के अनुसार, सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव को सदन में रखकर अवैधानिक तरीके से खारिज कर दिया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बार काउंसिल ने 8 सितंबर को वर्चुअल आपात बैठक की।
बैठक में दोनों पदाधिकारियों को निलंबित करने और कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया गया। इसके बाद मामला अनुशासन समिति को सौंप दिया गया।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिया सुनवाई का मौका
बार काउंसिल के फैसले के खिलाफ दोनों पदाधिकारियों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) में आवेदन किया। बीसीआई ने 10 सितंबर को आदेश दिया कि दोनों को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई न की जाए।
इसके बाद उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने 11 सितंबर को दोबारा आपात बैठक की और मामले को अनुशासन समिति के पास भेज दिया।
11 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
शनिवार को अनुशासन समिति के सामने दोनों अधिवक्ता अपने वकील अनीश कुमार सिंह के साथ पेश हुए। उन्होंने वकालतनामा दाखिल करने के साथ ही शिकायत की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
समिति ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताते हुए दोनों का पंजीकरण लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित रखने का फैसला किया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 11 अक्टूबर 2026 को होगी। तब तक दोनों अधिवक्ता किसी भी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकेंगे।

