Dehradun Road Accident: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में दिवाली की खरीदारी कर लौट रहे एक परिवार के साथ दर्दनाक हादसा हो गया। मोहब्बेवाला चौक के पास तेज रफ्तार कंटेनर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराया और कार पर पलट गया। भारी कंटेनर के नीचे दबने से कार सवार जीएसटी अधिवक्ता, उनकी पत्नी, मां और चालक की मौत हो गई। वहीं, कार में फंसे दंपति के छह वर्षीय बेटे को करीब सवा दो घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हादसा दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ। सहारनपुर निवासी 38 वर्षीय विश्वेश कपूर अपनी पत्नी निशा आनंद कपूर, मां किरण कपूर और छह वर्षीय बेटे माहेर के साथ दिवाली की खरीदारी कर लौट रहे थे। कार में उनका चालक नीरज भी मौजूद था।
डिवाइडर से टकराकर कार पर पलटा कंटेनर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मोहब्बेवाला चौक के पास स्पीड ब्रेकर पर तेज रफ्तार कंटेनर अनियंत्रित हो गया। इसके बाद वह डिवाइडर पर चढ़ते हुए कार पर पलट गया। कंटेनर प्लास्टिक के दानों से भरे कट्टों से लदा था। भारी वाहन के नीचे दबने से कार बुरी तरह पिचक गई।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं। कंटेनर का वजन अधिक होने के कारण उसे हटाने में काफी परेशानी हुई। क्रेन की मदद से शाम करीब 5:50 बजे कंटेनर हटाया जा सका।
कार की छत काटकर बच्चे को निकाला बाहर
कंटेनर हटाने के बाद बचाव दल ने कटर से कार की छत और खिड़कियां काटीं। टीम ने चार लोगों के शव बाहर निकाले। इसी दौरान कार के अंदर छह वर्षीय माहेर जीवित मिला। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद कंटेनर का चालक और क्लीनर मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
फायर एनओसी के बदले रिश्वत लेते अधिकारी गिरफ्तार
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में विजिलेंस ने रिश्वत लेने के आरोप में कोटद्वार फायर स्टेशन के प्रभारी अग्निशमन अधिकारी भूपेश त्यागी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने लैंसडौन में निर्माणाधीन होटल की फायर एनओसी जारी करने के बदले होटल व्यवसायी से 20 हजार रुपये मांगे थे।
शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना देहरादून स्थित सतर्कता विभाग को दी थी। बुधवार को विजिलेंस टीम ने शिकायतकर्ता के माध्यम से छह हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
सतर्कता विभाग के अनुसार, आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।

