UP New Labour Laws:उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने निजी क्षेत्र के श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें नियम, 2026’ का मसौदा (Draft) जारी कर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। इस नई व्यवस्था के लागू होते ही प्रदेश में दशकों से चले आ रहे 8 अलग-अलग श्रम कानून निरस्त हो जाएंगे और उनकी जगह एक एकीकृत (Unified) श्रम संहिता प्रभावी होगी। नए नियमों के तहत अब 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी निजी प्रतिष्ठानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों में सुधार करना और कर्मचारियों के स्वास्थ्य व अधिकारों को कानूनी रूप से और अधिक मजबूत बनाना है।
ऑनलाइन पंजीकरण और शुल्क का नया ढांचा
नए नियमों के अनुसार, सभी कारखानों, निर्माण स्थलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सरकारी पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा।
* पंजीकरण शुल्क: यह शुल्क कर्मचारियों की कुल संख्या के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।
* विलंब शुल्क: यदि कोई प्रतिष्ठान निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण नहीं कराता है, तो उस पर 10 प्रतिशत वार्षिक विलंब शुल्क लगाया जाएगा।
* अपडेट: प्रतिष्ठान के विवरण में किसी भी बदलाव की सूचना 30 दिनों के भीतर पोर्टल पर देनी अनिवार्य होगी।
खतरनाक उद्योगों और मशीनरी के लिए कड़े प्रावधान
सरकार ने उन श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया है
सुरक्षा ऑडिट: नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी मशीनरी और उपकरण दुर्घटना मुक्त हों।
संचालन सीमा: लगातार चलने वाली मशीनरी और कन्वेयर बेल्ट के लिए काम के घंटों और गति की विशिष्ट सीमाएं तय की जाएंगी।
विशेष अनुमति: ऐसे संवेदनशील कार्यों के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अब अनिवार्य होगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा: 45 वर्ष से अधिक उम्र के लिए वार्षिक जांच
कर्मचारियों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए नए ड्राफ्ट में ‘हेल्थ चेकअप’ को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं:
अनिवार्य जांच: 45 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी कर्मचारियों के लिए साल में एक बार चिकित्सा जांच (Medical Checkup) कराना नियोक्ता की जिम्मेदारी होगी।
इमरजेंसी प्लान: 5 मंजिल या 20 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए आपातकालीन योजना बनाना और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण देना अनिवार्य कर दिया गया है।
सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित
सरकार ने इस मसौदे को सार्वजनिक कर दिया है और अगले 45 दिनों तक इस पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इच्छुक व्यक्ति या संगठन अपने सुझाव प्रिंसिपल सेक्रेटरी (श्रम) या श्रम कमिश्नर को भेज सकते हैं। इन सुझावों पर विचार करने के बाद ही नियमों को अंतिम रूप देकर पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

