Education News: दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। स्कूल फीस को लेकर लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने बड़ा फैसला लिया है। अब राजधानी के किसी भी मान्यता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल को अभिभावकों पर एक साथ दो या तीन महीने की फीस जमा करने का दबाव बनाने की अनुमति नहीं होगी।
यह फैसला उन माता-पिता के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो स्कूलों की तिमाही फीस प्रणाली के कारण आर्थिक दबाव झेल रहे थे। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि फीस केवल मासिक आधार पर ही वसूली जाएगी।
अभिभावकों की शिकायतों के बाद उठाया कदम
शिक्षा निदेशालय को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल नियमों की अनदेखी कर अभिभावकों से एक साथ तिमाही या उससे ज्यादा फीस जमा करने की मांग कर रहे थे।
इससे खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि एकमुश्त बड़ी रकम जमा करना उनके लिए आसान नहीं था।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
पुराने नियम और कोर्ट के आदेश का हवाला
नए आदेश में DoE ने 15 फरवरी 2019 को जारी सर्कुलर और 2013 के ‘राहुल चड्ढा बनाम समर फील्ड स्कूल’ मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया है।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि स्कूलों को फीस मासिक आधार पर ही लेनी चाहिए और अभिभावकों पर एडवांस फीस का दबाव नहीं डालना चाहिए।
अब इसी आदेश को फिर से लागू करते हुए स्कूलों को चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्कूलों को दी गई सख्त चेतावनी
शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को एडवांस फीस जमा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर कोई स्कूल ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
विभाग ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अभिभावकों को मिली बड़ी राहत
इस फैसले से दिल्ली के हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। अब उन्हें हर महीने अपनी क्षमता के अनुसार फीस जमा करने की सुविधा मिलेगी और एकमुश्त आर्थिक बोझ से बचाव होगा। शिक्षा विभाग का यह कदम अभिभावकों के हित में बड़ा और जरूरी फैसला माना जा रहा है।

