Abhijeet Dipke E20 Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक आंदोलन का नेतृत्व करने वाले CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके अब इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के मुद्दे पर भी खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल द्वारा शुरू किए गए E20 विरोधी अभियान को अपना समर्थन देते हुए सरकार से कई सवाल पूछे।
100% पेट्रोल नहीं तो पूरे दाम क्यों?
अभिजीत दीपके ने कहा कि जब उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल नहीं मिल रहा और उसमें इथेनॉल मिलाया जा रहा है, तो फिर पूरे दाम वसूलना उचित नहीं है। उनका कहना है कि E20 ब्लेंडिंग का असर कई वाहनों के इंजन और माइलेज पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि आम लोगों की जेब और वाहन दोनों से जुड़ा सवाल है।
आरक्षण पर भी रखी अपनी राय
दीपके ने आरक्षण हटाने की मांग को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य लोगों को शिक्षा तक पहुंच देना है, न कि उन्हें कोई विशेष सुविधा या संपत्ति देना। उनके मुताबिक देश में कोशिश इस बात की होनी चाहिए कि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक अच्छी शिक्षा पहुंचे।उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस आंदोलन की पूरी जानकारी हाल ही में मिली है, इसलिए वह इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते।
RSS और संविधान पर भी साधा निशाना
RSS प्रमुख मोहन भागवत के युवाओं से संवाद की पहल पर दीपके ने कहा कि शुरुआत अच्छी है, लेकिन यदि युवाओं को नेतृत्व में जगह नहीं मिलेगी तो संवाद का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
वहीं RSS नेता अतुल लिमये के उस बयान पर, जिसमें NEET आंदोलन को संविधान विरोधी बताया गया था, दीपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संविधान पर भाषण देने से पहले इतिहास को भी याद रखना चाहिए।
CJP का अगला रोडमैप होगा तय
दीपके ने बताया कि CJP की दो दिवसीय बैठक आयोजित की जा रही है। इसमें जंतर-मंतर आंदोलन से मिले अनुभवों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य में संगठन को देशभर में कैसे मजबूत बनाया जाए, इस पर चर्चा होगी। बैठक में आगामी अभियानों और रणनीति पर भी मंथन किया जाएगा।
शिकायतों पर क्या बोले?
अपने खिलाफ दर्ज शिकायतों को लेकर दीपके ने कहा कि उन्हें शिकायतकर्ता की जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक सार्वजनिक जीवन में ऐसी शिकायतें होती रहती हैं और कई बार उनका उद्देश्य केवल प्रचार हासिल करना भी होता है।
फिलहाल E20 को लेकर देशभर में बहस तेज होती दिखाई दे रही है। जहां एक ओर सरकार इसे स्वच्छ ईंधन की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठन इसके आर्थिक और तकनीकी प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और जनहित दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

