Rahul Gandhi: 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होने जा रहा है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। वहीं व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M ट्रांजैक्शन भी प्रभावित नहीं होंगे।
राहुल गांधी ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे UPI पर टैक्स बताया और वापस लेने की मांग की। सरकार ने जवाब में कहा है कि MDR न तो टैक्स है और न ही सरकार या NPCI द्वारा सीधे वसूला जाने वाला शुल्क है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और ऐप कंपनियों के बीच बांटा जाएगा।
समिति में कौन-कौन से कांग्रेस सांसद थे?
विवाद तब बढ़ा जब सरकार की ओर से अगस्त में वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया गया। रिपोर्ट में UPI के लिए चरणबद्ध MDR/रेवेन्यू मॉडल बनाने की जरूरत बताई गई थी। 12 अगस्त को रिपोर्ट अपनाए जाने की बैठक में कांग्रेस के पांच सांसद—पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ—मौजूद थे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रकाशित कार्यवाही में इन सांसदों की कोई असहमति दर्ज नहीं है।
क्या समिति की सिफारिश और नया MDR एक ही है?
यहां दोनों के बीच अंतर समझना जरूरी है। समिति ने UPI के लिए एक टिकाऊ राजस्व व्यवस्था और टियर आधारित MDR ढांचे की जरूरत बताई थी। बाद में केंद्र ने 2,000 रुपये से अधिक के कुछ P2M भुगतान के लिए 0.4% MDR का विशिष्ट ढांचा लागू करने की घोषणा की। इसलिए समिति की सिफारिश को सीधे मौजूदा 0.4% दर के समान मानना सही नहीं होगा।
कांग्रेस सांसदों ने क्या कहा?
सरकार की ओर से समिति में मौजूदगी और असहमति दर्ज नहीं होने को राहुल गांधी के विरोध के संदर्भ में उठाया गया है। हालांकि, किसी सांसद का समिति की बैठक में मौजूद होना अपने आप में उस सांसद की व्यक्तिगत रूप से बाद में लागू किए गए 0.4% MDR के समर्थन की पुष्टि नहीं करता। प्रकाशित रिपोर्टों में कांग्रेस नेताओं की ओर से समिति की सिफारिश और मौजूदा शुल्क व्यवस्था के बीच अंतर पर आपत्ति दर्ज किए जाने की भी जानकारी है।
UPI विवाद का मुख्य मुद्दा क्या है?
एक तरफ सरकार UPI के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और संचालन की लागत के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत बता रही है। दूसरी तरफ विपक्ष इस शुल्क व्यवस्था और इसके संभावित आर्थिक प्रभाव पर सवाल उठा रहा है। नए नियम में ग्राहकों से MDR वसूलने की अनुमति नहीं है और सरकार ने इसके पालन की निगरानी की बात कही है।

