India GDP Growth: अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8% की वृद्धि दर्ज की। यह पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में दर्ज 6.9% की तुलना में बेहतर है, हालांकि जनवरी-मार्च तिमाही की 8.6% वृद्धि से कम है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर को इस प्रदर्शन की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। यह आंकड़ा बाजार के औसत अनुमान और आरबीआई के 7% के पूर्वानुमान से भी ऊपर रहा।
सरकार ने बताया अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने GDP के प्रदर्शन को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग की GDP में हिस्सेदारी करीब 17% है, जो सरकार के 25% लक्ष्य से अभी कम है।
GDP आंकड़ों पर क्यों उठे सवाल?
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले साल की नॉमिनल GDP के आंकड़े में बड़ा संशोधन किया गया है। उनके अनुसार, पुराने और संशोधित आधार की तुलना करने पर इस साल की वृद्धि काफी अलग दिखाई दे सकती है। उन्होंने GDP आंकड़ों के गहन विश्लेषण की जरूरत बताई।
अनौपचारिक क्षेत्र को लेकर भी चिंता
अर्थशास्त्री अरुण कुमार भी लंबे समय से आधिकारिक GDP आंकड़ों में अनौपचारिक क्षेत्र के पर्याप्त प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका तर्क है कि भारत में रोजगार का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में है, जबकि कई तिमाही संकेतक मुख्य रूप से औपचारिक अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को दर्शाते हैं।
आगे क्या चुनौती?
भारत के सामने तेज आर्थिक विकास के साथ रोजगार, महंगाई और मैन्युफैक्चरिंग हिस्सेदारी बढ़ाने की चुनौती भी बनी हुई है। ऐसे में GDP की मजबूत दर के साथ आर्थिक वृद्धि की गुणवत्ता और उसका आम लोगों पर असर भी महत्वपूर्ण रहेगा।

