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बुधवार, सितम्बर 9, 2026
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President’s Bodyguard: राष्ट्रपति के अंगरक्षक बनने के लिए इन योग्यताओं के साथ किसी विशेष जाति का होना भी है जरूरी?

President’s Bodyguard: जब राष्ट्रपति किसी राष्ट्रीय समारोह में शामिल होते हैं तो उनके साथ खास वर्दी में घुड़सवार जवान नजर आते हैं। ये जवान President’s Bodyguard (PBG) का हिस्सा होते हैं। अपनी शानदार वर्दी, घुड़सवारी और अनुशासन के कारण PBG की अलग पहचान है।

PBG का इतिहास करीब ढाई सदियों पुराना है। इसकी शुरुआत 1773 में बनारस में तत्कालीन गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स ने की थी। उस समय इसमें करीब 50 घुड़सवार सैनिक शामिल थे। बाद में यह यूनिट Governor-General’s Bodyguard और फिर Viceroy’s Bodyguard के नाम से जानी गई।

जाट, सिख और राजपूतों की भर्ती की परंपरा

PBG से जुड़ी सबसे चर्चित बात इसकी ऐतिहासिक भर्ती संरचना है। इस यूनिट में लंबे समय से जाट, सिख और राजपूत समुदायों से सैनिकों की भर्ती की परंपरा रही है। हालांकि, केवल किसी समुदाय से ताल्लुक रखना राष्ट्रपति का अंगरक्षक बनने के लिए पर्याप्त नहीं है।

उम्मीदवारों को सैन्य योग्यता, शारीरिक क्षमता, फिटनेस और अन्य निर्धारित मानकों पर खरा उतरना पड़ता है। चयन प्रक्रिया काफी कठिन मानी जाती है।

सिर्फ लंबा कद होना काफी नहीं

PBG के जवानों के लिए शारीरिक क्षमता और प्रभावशाली व्यक्तित्व महत्वपूर्ण होता है। लंबे कद और मजबूत शरीर वाले सैनिक इस भूमिका के लिए उपयुक्त माने जाते रहे हैं, लेकिन सिर्फ कद के आधार पर चयन नहीं होता।

घुड़सवारी में दक्षता, शारीरिक फिटनेस और सैन्य प्रशिक्षण भी अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि PBG में शामिल होने वाले जवानों को विशेष मानकों और कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।

पैराट्रूपर और आर्मर्ड वॉरियर भी होते हैं

PBG को केवल परेड या समारोहों में राष्ट्रपति के साथ चलने वाली यूनिट समझना सही नहीं है। इसके जवान घुड़सवारी के साथ-साथ पैराट्रूपर और आर्मर्ड वॉरियर के तौर पर भी प्रशिक्षित होते हैं।

शांति के समय वे राष्ट्रपति से जुड़े औपचारिक कार्यक्रमों में जिम्मेदारी निभाते हैं, जबकि आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों में भी भूमिका निभा सकते हैं।

1950 में मिला President’s Bodyguard नाम

भारत के गणराज्य बनने के बाद 27 जनवरी 1950 को इस यूनिट का नाम बदलकर President’s Bodyguard कर दिया गया। आज यह भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है और राष्ट्रपति की अपनी सैन्य यूनिट मानी जाती है।

 

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