Fundamental Rights: भारत के संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होकर प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। हालांकि यह अधिकार पूर्ण नहीं है। सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार उचित प्रतिबंध लगा सकती है। ऐसे में बिना अनुमति प्रदर्शन, निषेधाज्ञा का उल्लंघन या हिंसा होने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
किन परिस्थितियों में हो सकती है गिरफ्तारी?
यदि प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव, आगजनी, सरकारी संपत्ति को नुकसान, पुलिस के कार्य में बाधा, बैरिकेड तोड़ना या लंबे समय तक सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध करना जैसी घटनाएं होती हैं, तो पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत गिरफ्तारी कर सकती है। धारा 163 लागू होने पर गैर-कानूनी जमावड़े के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
गिरफ्तारी के समय आपके अधिकार
कानून के अनुसार गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को अपनी पहचान बतानी होती है। गिरफ्तारी का मेमो तैयार किया जाता है, जिस पर गवाह और गिरफ्तार व्यक्ति के हस्ताक्षर होते हैं। आरोपी को गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है। उसे अपने परिवार या किसी परिचित को सूचना देने और वकील से संपर्क करने का अधिकार भी प्राप्त है। महिलाओं की गिरफ्तारी के लिए विशेष नियम लागू होते हैं और सामान्य परिस्थितियों में रात में गिरफ्तारी से बचा जाता है।
थाने से लेकर कोर्ट तक की प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को थाने ले जाकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करती है और उसकी व्यक्तिगत तलाशी लेकर जब्त सामान की रसीद देती है। कानून के अनुसार आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है। यदि पुलिस हिरासत में रखा जाता है तो नियमित मेडिकल जांच भी कराई जाती है।
कोर्ट क्या तय करती है?
मजिस्ट्रेट यह जांचते हैं कि गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हुई या नहीं। इसके बाद मामले की गंभीरता के आधार पर जमानत, न्यायिक हिरासत या सीमित अवधि की पुलिस रिमांड का फैसला किया जाता है। यदि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर है तो उसे निःशुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।

