Sara Ali Khan Kedarnath Controversy: बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी फिल्म नहीं, बल्कि केदारनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा करना है। उत्तर प्रदेश के बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके मंदिर जाने पर आपत्ति जताते हुए फतवा जारी किया है। उन्होंने सारा को तौबा करने और अल्लाह से माफी मांगने की सलाह दी है। इस विवाद के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या कोई मौलाना फतवा जारी करके किसी को मंदिर जाने से रोक सकता है?
सारा अली खान के खिलाफ क्यों जारी हुआ फतवा?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के मुताबिक, इस्लामी शरीयत में दूसरे धर्म के धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होना जायज नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सारा ने अपनी मर्जी से केदारनाथ में पूजा-पाठ किया है तो यह शरीयत के खिलाफ है। मौलाना ने अभिनेत्री को तौबा करने और अल्लाह से माफी मांगने की सलाह दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सारा 25 अक्टूबर 2026 को केदारनाथ पहुंची थीं। उन्हें मंदिर में दर्शन के लिए कतार में खड़े और हाथ जोड़कर प्रार्थना करते देखा गया था।
क्या फतवे से किसी को मंदिर जाने से रोका जा सकता है?
इसका जवाब है- नहीं। भारत में फतवा अदालत का फैसला या सरकारी आदेश नहीं होता। यह किसी इस्लामी विद्वान की धार्मिक राय होती है, जिसे मानना या न मानना संबंधित व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है।
साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘विश्व लोचन मदन बनाम भारत संघ’ मामले में स्पष्ट किया था कि फतवे का कानूनी बल नहीं होता और इसे किसी पर जबरन लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए केवल किसी मौलाना के फतवे के आधार पर सारा अली खान को मंदिर जाने से कानूनी रूप से नहीं रोका जा सकता।
संविधान का अनुच्छेद 25 क्या कहता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, उसका पालन करने तथा प्रचार करने का अधिकार देता है। हालांकि, यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और संविधान के अन्य प्रावधानों के अधीन है। किसी धार्मिक नेता की निजी राय अपने आप में किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों पर कानूनी रोक नहीं लगा सकती।
केदारनाथ मंदिर में प्रवेश के क्या हैं नियम?
इस विवाद का एक अलग पहलू बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के प्रवेश संबंधी नियम हैं। मार्च 2026 में समिति ने गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। इसके तहत सनातन धर्म में आस्था रखने वाले गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को शपथपत्र देकर दर्शन की अनुमति देने की बात सामने आई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सारा अली खान की टीम ने भी उनके दर्शन से पहले जरूरी शपथपत्र जमा किया था। यानी मंदिर में प्रवेश का मामला समिति की शर्तों से जुड़ा है, न कि बरेली के मौलाना के फतवे से।

