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शनिवार, अगस्त 1, 2026
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AI Content Rules: 2 अगस्त से European Union में लागू होंगे नए नियम, AI फोटो-वीडियो पर बताना होगा सच

European Union 2 अगस्त 2026 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार या एडिट किए गए कंटेंट को लेकर नए ट्रांसपेरेंसी नियम लागू करने जा रहा है। इन नियमों का उद्देश्य डीपफेक, फर्जी कंटेंट और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाना है। नियम लागू होने के बाद AI से बने फोटो, वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट की स्पष्ट पहचान कराना अनिवार्य होगा।

क्या होंगे नए नियम?

नए नियमों के तहत AI चैटबॉट, AI एजेंट और AI अवतार उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म को पहले ही बताना होगा कि यूजर किसी इंसान नहीं, बल्कि AI सिस्टम से बातचीत कर रहा है। AI से तैयार या संशोधित कंटेंट में मशीन-पठनीय (Machine Readable) लेबल या डिजिटल मार्क देना भी अनिवार्य होगा, ताकि उसकी पहचान आसानी से की जा सके।

डीपफेक पर सख्ती

AI से बनाए गए या बदले गए डीपफेक फोटो और वीडियो बिना खुलासा किए साझा नहीं किए जा सकेंगे। जनहित से जुड़े समाचार, तस्वीर या अन्य सामग्री में भी AI का उपयोग होने पर इसकी जानकारी देना जरूरी होगा। हालांकि, यदि कंटेंट की पूरी संपादकीय समीक्षा किसी इंसान ने की है, तो कुछ मामलों में छूट मिल सकती है।

नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना

EU AI Act के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 1.5 करोड़ यूरो तक या उनके वैश्विक वार्षिक कारोबार के 3 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए जुर्माना तय करते समय उनके आकार का भी ध्यान रखा जाएगा।

भारत और दूसरे देशों में क्या स्थिति है?

भारत में फिलहाल AI के लिए अलग कानून नहीं है, लेकिन आईटी नियम, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत AI से जुड़े मामलों को नियंत्रित किया जाता है। फरवरी 2026 से AI कंटेंट पर लेबलिंग और डिजिटल मेटाडेटा से जुड़े प्रावधान लागू हैं। वहीं चीन पहले ही AI कंटेंट लेबलिंग अनिवार्य कर चुका है, जबकि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के कई राज्यों ने भी डीपफेक पर सख्त नियम बनाए हैं।

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