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Monday, June 29, 2026
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राम मंदिर दान चोरी मामले में बड़ा खुलासा, SBI की चेतावनी के बावजूद क्यों नहीं हुई कार्रवाई? सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

Ayodhya News: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को करीब तीन महीने पहले ही दान राशि की गिनती में गड़बड़ी का संदेह हो गया था। बैंक ने इस संबंध में संबंधित कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश भी की थी, लेकिन कथित तौर पर मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप के कारण यह कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब पुलिस और SIT इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।

तीन महीने पहले ही मिला था गड़बड़ी का संकेत

राम मंदिर की दान पेटियों से निकलने वाली नकदी की गिनती SBI की निगरानी में एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कराई जाती थी। जांच में सामने आया है कि बैंक को गिनती के दौरान संभावित अनियमितताओं का संदेह हुआ था। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों को हटाने का सुझाव दिया गया, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर किन कारणों से बैंक की सिफारिश पर अमल नहीं किया गया और क्या इसके पीछे किसी प्रकार का दबाव या प्रभाव था।

अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार

दान राशि की गिनती से जुड़े कई कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए हुई थी। जांच के दौरान अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, अवनीश और करुणेश शुक्ला समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इन कर्मचारियों का मंदिर ट्रस्ट से जुड़े किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंध था। फिलहाल टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच जारी है।

चंपत राय का बयान भी दर्ज

जांच के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया गया है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी नोटिस भेजे जाने की संभावना है। वहीं, बैंक से जुड़े दो कर्मचारियों रत्नेश और गगनदीप की भूमिका भी जांच के दायरे में है, क्योंकि वे दान राशि की गिनती के दौरान मौजूद रहते थे।

पुलिस और SIT की नजर वित्तीय लेन-देन पर

जांच एजेंसियां केवल नकदी की गिनती तक सीमित नहीं हैं। पुलिस और SIT अब धन के प्रवाह, बैंक रिकॉर्ड, संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

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