Kanpur News: कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, विनीत की हत्या की साजिश किसी और ने नहीं, बल्कि उनके बेटे सुब्रत मिनोचा ने रची थी। पूछताछ के दौरान सुब्रत ने हत्या की पूरी योजना के बारे में कई अहम बातें बताईं। इस मामले में पहले आरोपी बनाई गई विनीत की बहू शालू की भूमिका पर भी पुलिस ने जांच की है और फिलहाल उसे साजिश में शामिल नहीं माना जा रहा है।
बेटे ने ही रची थी हत्या की योजना
पुलिस के अनुसार, सुब्रत ने बताया कि उसने करीब 34 महीने पहले अपने पिता की हत्या की योजना बनानी शुरू की थी। इसके लिए उसने पुराने नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर से संपर्क किया। कथित तौर पर विशाल को घर की डुप्लीकेट चाबी भी दी गई थी।
सुब्रत ने पुलिस को बताया कि वह चाहता था कि पिता के घर लौटने के बाद दोनों कमरे में छिप जाएं। विनीत के खाना खाने और सो जाने के बाद उनकी हत्या करने की योजना बनाई गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि घर के कैमरे की रिकॉर्डिंग बंद करने की तैयारी पहले से की गई थी।
40 लाख रुपये के कर्ज का भी जिक्र
पूछताछ में सुब्रत ने अपने ऊपर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज होने की बात बताई। उसके मुताबिक, हर महीने करीब 55 हजार रुपये की किस्त जाती थी। पैसों की कमी होने पर वह नया लोन लेकर पुराना भुगतान करता था और क्रेडिट कार्ड से भी रकम जुटाता था।
पुलिस का कहना है कि सुब्रत के खर्चीले व्यवहार, नशे और जुए की आदत तथा आर्थिक दबाव को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या की साजिश के पीछे आर्थिक वजहों की कितनी भूमिका थी।
बहू शालू को फंसाने की कोशिश?
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि कथित तौर पर शालू का नाम लेने की योजना बनाई गई थी। पुलिस के मुताबिक, सुब्रत ने पूछताछ में कहा कि अगर आरोपी पकड़े जाएं तो उसका नाम न लेकर शालू का नाम लिया जाए।
पुलिस का कहना है कि शालू का हत्या की साजिश में कोई रोल सामने नहीं आया है। इसी आधार पर उसे इस मामले में क्लीन चिट दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, जांच अभी जारी है और अंतिम स्थिति पुलिस की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
5 सितंबर को फ्लैट में हुई थी हत्या
विनीत मिनोचा की 5 सितंबर की रात इंद्रानगर स्थित फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने उनकी पत्नी शालू, पुराने नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया था।
बाद में पूछताछ और आमने-सामने बैठाकर किए गए सवाल-जवाब के दौरान पुलिस को सुब्रत की भूमिका पर संदेह हुआ। करीब 18 दिन बाद शालू के सामने सुब्रत से भी पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, जवाबों में विरोधाभास मिलने के बाद जांच की दिशा बदली और सुब्रत को गिरफ्तार किया गया।

