Uttar Pradesh: उन्नाव के मौरावां क्षेत्र के भगवान थोक मवई गांव में एक दर्दनाक घटना से परिवार और पूरे गांव में मातम पसर गया। पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए 30 वर्षीय श्यामबाबू की 37 दिन बाद लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई। उनका शव घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद उनकी चार वर्षीय बेटी अल्लों ने भी दम तोड़ दिया। पिता-पुत्री की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
लकड़ी काटते समय पेड़ से गिरे थे श्यामबाबू
बताया गया कि 13 अगस्त को श्यामबाबू गांव के ठेकेदार राधेश्याम के साथ लकड़ी काटने गए थे। पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काटने के दौरान अचानक वह नीचे गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों ने ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घायल श्यामबाबू को इलाज के लिए लखनऊ स्थित केजीएमयू ले जाया गया, जहां उनका लगातार इलाज चल रहा था।
37 दिन बाद इलाज के दौरान हुई मौत
काफी समय तक इलाज चलने के बाद शनिवार देर रात श्यामबाबू ने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के बाद रविवार दोपहर करीब तीन बजे उनका शव घर पहुंचा। पति का शव देखते ही पत्नी बिटोल बेसुध हो गईं। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही देर बाद चार वर्षीय बेटी अल्लों की मौत की खबर ने सभी को झकझोर दिया।
पिता का शव पहुंचा और बेटी ने भी तोड़ा दम
अल्लों करीब एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थी। परिजन स्थानीय स्तर पर उसका इलाज करा रहे थे। पिता का शव घर पहुंचने के कुछ समय बाद ही उसकी भी मौत हो गई। एक तरफ पति का शव और दूसरी तरफ मासूम बेटी की मौत से मां बिटोल का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
एक ही घर से उठीं पिता-पुत्री की अर्थियां
श्यामबाबू चार बच्चों के पिता थे। उनके दो बेटे भोंदू और अनुभव तथा दो बेटियां नीलू और अल्लों थीं। पिता और बेटी की मौत के बाद गांव में हर आंख नम दिखाई दी। श्यामबाबू का खेत में अंतिम संस्कार किया गया, जबकि पास ही बेटी अल्लों को मिट्टी दी गई।
परिजनों ने की कार्रवाई की मांग
दोहरे सदमे के बीच परिजनों ने लकड़ी कटाई के दौरान हुई घटना की जिम्मेदारी तय करने और पूर्व में दर्ज मुकदमे में धाराएं बढ़ाने की मांग की है। प्रभारी निरीक्षक कुंवर बहादुर सिंह के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

