Uttarakhand के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध वैली ऑफ फ्लावर्स (फूलों की घाटी) एक बार फिर पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। हर साल मानसून के मौसम में यह घाटी हजारों रंग-बिरंगे फूलों से सज जाती है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, दुर्लभ वनस्पतियों और शांत वातावरण के कारण यह घाटी हिमालय की सबसे खूबसूरत जगहों में गिनी जाती है।
अगस्त में दिखता है घाटी का सबसे खूबसूरत रूप
वैली ऑफ फ्लावर्स की सबसे बड़ी पहचान यहां मानसून के दौरान खिलने वाले हजारों दुर्लभ फूल हैं। जून में बर्फ पिघलने के बाद घाटी में हरियाली दिखाई देने लगती है। जुलाई से फूल खिलना शुरू होते हैं, जबकि अगस्त के महीने में घाटी अपने सबसे सुंदर रूप में नजर आती है।
इस दौरान पूरी घाटी गुलाबी, बैंगनी, नीले, सफेद और पीले फूलों से ढक जाती है। यहां हिमालयन ब्लू पॉपी, ब्रह्म कमल, कोबरा लिली सहित कई दुर्लभ और औषधीय पौधों की प्रजातियां देखने को मिलती हैं। सितंबर में फूलों की संख्या कम होने लगती है, लेकिन हिमालय की बर्फीली चोटियों और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है।
दुर्लभ वन्यजीवों का भी है बसेरा
यह घाटी केवल फूलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां रेड फॉक्स, ब्लू शीप, हिमालयन मस्क डियर जैसे दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। कभी-कभी भाग्यशाली पर्यटकों को दुर्लभ स्नो लेपर्ड की झलक भी देखने को मिल सकती है, हालांकि ऐसा बहुत कम होता है।
ऐसा है ट्रेकिंग रूट
वैली ऑफ फ्लावर्स की यात्रा गोविंदघाट के पास स्थित पुलना गांव से शुरू होती है। यहां से लगभग 9 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर घांघरिया पहुंचना होता है। घांघरिया में रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन करीब 4 किलोमीटर का ट्रेक करके फूलों की घाटी तक पहुंचा जा सकता है।
यात्रा से पहले रखें इन बातों का ध्यान
वैली ऑफ फ्लावर्स में प्रवेश के लिए परमिट लेना अनिवार्य है। घाटी के भीतर रात्रि विश्राम या कैंपिंग की अनुमति नहीं है। सभी पर्यटकों को शाम 5 बजे तक वापस घांघरिया लौटना होता है।
मानसून के दौरान ट्रेकिंग मार्ग फिसलन भरे हो सकते हैं, इसलिए मजबूत ट्रेकिंग शूज, रेनकोट, गर्म कपड़े और ट्रेकिंग पोल साथ रखना जरूरी है। मौसम में अचानक बदलाव की संभावना को देखते हुए यात्रियों को पूरी तैयारी के साथ यात्रा पर निकलने की सलाह दी जाती है।

