UP TB Test: उत्तर प्रदेश में अब ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को टीबी की जांच के लिए बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के 75 जिलों और 827 विकासखंडों के अस्पतालों में 1,639 नई आणविक जांच मशीनें उपलब्ध कराई हैं।
इन मशीनों का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेजों और चुनिंदा टीबी अस्पतालों में पहले से किया जा रहा था। अब इन्हें ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने से टीबी की जांच और रोग की पहचान को तेज करने का दावा किया गया है।
दो घंटे में मिल सकेगी जांच रिपोर्ट
एनएचएम की निदेशक एवं स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल के मुताबिक, प्रत्येक ब्लॉक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और क्षय रोग इकाइयों में आणविक जांच मशीनें भेजी गई हैं। आरोग्य मंदिरों में कैंप लगाकर भी जांच की जा रही है।
लैब तकनीशियन मरीज के बलगम का सैंपल लेकर जांच करते हैं और करीब दो घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा सकती है।
2025 में 7.7 लाख मरीजों का पंजीकरण
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में प्रदेश में करीब 7.7 लाख टीबी मरीजों का पंजीकरण हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का 104 प्रतिशत था। चालू वर्ष के पहले छह महीनों में 3.37 लाख टीबी मरीज खोजे गए हैं और उनका इलाज जारी है।
सरकार के अनुसार, प्रदेश की 16,140 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं।
दवा प्रतिरोध की भी मिलती है जानकारी
आणविक जांच मशीन मरीज के बलगम में टीबी बैक्टीरिया के जेनेटिक मटेरियल की पहचान करती है। कम मात्रा में बैक्टीरिया मौजूद होने पर भी इसकी पहचान संभव है। खास बात यह है कि जांच से कुछ दवाओं के प्रति प्रतिरोध का संकेत भी मिल सकता है।
पहले स्पुटम कल्चर की जांच में दो से तीन दिन तक लग सकते थे। अब आधुनिक मशीनों से यह प्रक्रिया काफी तेज हो गई है।
एक्सरे और पोर्टेबल मशीनों का भी इस्तेमाल
टीबी की पहचान के लिए प्रदेश में 829 स्थिर डिजिटल एक्सरे और 357 पोर्टेबल एक्सरे इकाइयों को भी लगाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पोर्टेबल मशीनों की मदद से दूरदराज के इलाकों में भी मरीजों की जांच करना आसान हुआ है।
इसके अलावा दवा संवेदनशीलता जांच के लिए 14 प्रयोगशालाएं और पांच मध्यस्तरीय संदर्भ प्रयोगशालाएं भी काम कर रही हैं।

