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Tuesday, June 16, 2026
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Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी

Somvati Amavasya 2026: धर्मनगरी हरिद्वार में सोमवती अमावस्या के अवसर पर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही हर की पौड़ी समेत गंगा के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा पितरों की शांति के लिए प्रार्थना की।

इस बार सोमवती अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के अनुसार ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक करीब 300 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।

गंगा घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं घाटों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए प्रशासन ने 6 सुपर जोन, 16 जोन और 40 सेक्टर बनाए हैं। विभिन्न स्तर के पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की भी तैनाती की गई है।

पितृ तर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व

महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन गंगा स्नान के बाद भगवान शिव का अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है।

उन्होंने कहा कि जो लोग तीर्थ स्थलों तक नहीं पहुंच सकते, वे अपने घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं और अपने पूर्वजों का स्मरण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया तर्पण पितरों की शांति और मोक्ष के लिए फलदायी होता है।

पीपल पूजन का भी बताया महत्व

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों का उल्लेख करते हुए पीपल वृक्ष की महत्ता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पीपल को भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान प्राप्त है और सोमवती अमावस्या के दिन पीपल का पूजन तथा जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

हरिद्वार, प्रयागराज और अयोध्या में विशेष धार्मिक महत्व

महंत रवींद्र पुरी के अनुसार हरिद्वार के साथ-साथ प्रयागराज और अयोध्या जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी इस दिन स्नान और तर्पण का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस अवसर पर किए गए धार्मिक कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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