1996 में मिलीं, लेकिन रिश्ता पहचान नहीं पाईं
साल 1996 में नीदरलैंड में गोद लिए गए बच्चों का एक सम्मेलन हुआ था। मीना और मिनल भी इसमें शामिल हुईं। दोनों ने बातचीत की और जल्द ही उनके बीच दोस्ती हो गई। दोनों भारत में जन्मी थीं और डच परिवारों में पली-बढ़ी थीं, इसलिए उन्हें एक-दूसरे से खास अपनापन महसूस हुआ।दिलचस्प बात यह है कि सम्मेलन में कुछ लोगों ने दोनों की समानता देखकर मजाक में उन्हें बहनें भी कहा था। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह बात सच हो सकती है।बाद में दोनों कुछ समय तक संपर्क में रहीं, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत बंद हो गई और करीब 15 साल तक दोनों एक-दूसरे से दूर रहीं।
अप्रैल 2026 में DNA टेस्ट ने खोला राज
कहानी ने अप्रैल 2026 में बड़ा मोड़ लिया। मिनल ने MyHeritage के जरिए DNA टेस्ट कराया। रिपोर्ट में एक करीबी पारिवारिक मैच सामने आया और इसमें मीना का नाम देखकर वह हैरान रह गईं।इसके बाद पुरानी यादें और तस्वीरें सामने आने लगीं। आखिरकार DNA टेस्ट ने पुष्टि कर दी कि मीना और मिनल सगी बहनें हैं। यानी जिन दो महिलाओं ने 1996 में दोस्त के रूप में मुलाकात की थी, उनके बीच जन्म से ही बहन का रिश्ता था।
11 अगस्त को हुई भावुक मुलाकात
DNA से सच्चाई सामने आने के बाद दोनों ने फिर मिलने का फैसला किया। 11 अगस्त 2026 को नीदरलैंड में दोनों बहनें आमने-सामने मिलीं। इस बार मुलाकात का एहसास बिल्कुल अलग था। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और भावुक हो गईं।सबसे खास पल तब आया, जब उन्होंने पहली बार बहनों के रूप में साथ सेल्फी ली। मीना ने अपनी बहन से कहा कि उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे वह घर वापस आ गई हों।
अब हर दिन जुड़ रही हैं नई यादें
दोनों बहनों के अपने-अपने परिवार हैं और वे अपने गोद लेने वाले माता-पिता के प्यार को भी बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके लिए यह नया रिश्ता पुराने परिवार की जगह लेना नहीं, बल्कि जिंदगी की अधूरी कहानी का एक हिस्सा पूरा होना है।अब दोनों लगातार फोन और मैसेज के जरिए संपर्क में रहती हैं। 40 साल की दूरी के बाद वे एक-दूसरे को जानने और खोए हुए समय की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं।मीना और मिनल की कहानी बताती है कि कभी-कभी जिंदगी का सबसे बड़ा रिश्ता हमारे सामने होता है, लेकिन उसकी पहचान होने में कई दशक लग जाते हैं।

