Protest Guidelines: सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को आयोजित छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि जिसने भी कानून अपने हाथ में लिया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन हिंसा या अत्यधिक बल प्रयोग किसी भी पक्ष से स्वीकार्य नहीं हो सकता।
पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के निर्देश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि यदि जांच में जिम्मेदारी तय नहीं होती, तो ऐसी जांच का कोई औचित्य नहीं रह जाता। अदालत ने कहा कि जहां भी तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है, वहां कानून को निष्पक्ष रूप से अपना काम करना चाहिए।
लोकतंत्र में विरोध जरूरी, हिंसा नहीं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन किसी भी आंदोलन को दबाने के लिए अंधाधुंध लाठीचार्ज उचित नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के नाम पर हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना भी स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस, दोनों पर अनुशासन की समान जिम्मेदारी है।
देशभर के लिए बन सकती हैं नई गाइडलाइंस
सुनवाई के दौरान बिहार में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर AK-47 राइफल के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और भीड़ नियंत्रण के लिए एक समान दिशा-निर्देशों पर विचार करेगा। अदालत का मानना है कि स्पष्ट प्रोटोकॉल होने से भविष्य में ऐसे विवादों और टकराव की संभावना कम होगी।

