Delhi news:दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर नीरज सहरावत उर्फ नीरज बवाना को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर अपने परिवार से मिलने के लिए छह घंटे की कस्टडी पैरोल दी गई। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच उसे पहले हरिनगर स्थित घर और फिर मोतीनगर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसके नवजात बच्चों का इलाज चल रहा है।
पत्नी और बच्चों से मिलने पहुंचा नीरज
नीरज बवाना की पत्नी ने 14 अगस्त को समय से पहले तीन बच्चों को जन्म दिया था। बताया गया कि करीब 27 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद इमरजेंसी सर्जरी के जरिए डिलीवरी हुई। जन्म के कुछ घंटे बाद ही एक बच्चे की मौत हो गई। वहीं, बाकी दो बच्चों को अस्पताल के NICU में भर्ती कराया गया।
इनमें से एक बच्चे की हालत गंभीर बताई गई और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था, जबकि दूसरे बच्चे को CPAP सपोर्ट दिया जा रहा था। पत्नी को अब अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।
मीडिया से बोला- ‘थोड़ी इंसानियत दिखाई जाए’
परिवार से मिलने के दौरान नीरज बवाना ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत की। उसने कहा कि उसका एक बच्चा मर चुका है और दूसरा वेंटिलेटर पर है। उसने दावा किया कि इतने गंभीर पारिवारिक हालात के बावजूद उसे राहत नहीं मिल रही है।
नीरज ने कहा कि उसके मामले को 11 साल से ज्यादा समय हो चुका है और उसे लगता है कि कानून की तरफ से कोई राहत नहीं मिल रही। उसने यह भी कहा कि बच्चों की स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर राहत दी जानी चाहिए।
हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की अंतरिम जमानत?
नीरज बवाना ने पत्नी और बच्चों की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं, गैंगवार की आशंका और उसे हाई-रिस्क कैदी माने जाने के आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
इसके बजाय अदालत ने उसे पुलिस सुरक्षा में छह घंटे के लिए परिवार से मिलने की अनुमति दी। उसे सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक परिवार के पास रहने का समय दिया गया।
सेशन कोर्ट भी कर चुका था जमानत से इनकार
इससे पहले सत्र अदालत ने भी नीरज बवाना को हाई-रिस्क कैदी मानते हुए अंतरिम जमानत की अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद उसके वकीलों ने हाई कोर्ट का रुख किया।

