Bollywood News: बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की निजी जिंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह बनी हैं उनकी रूमर्ड गर्लफ्रेंड अनीता आडवाणी, जिन्होंने एक इंटरव्यू में राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया के रिश्ते को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। उनके बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और फैंस के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
अनीता आडवाणी ने क्या कहा?
एक इंटरव्यू में अनीता आडवाणी ने दावा किया कि राजेश खन्ना अपनी पत्नी डिंपल कपाड़िया से कई बार तलाक लेना चाहते थे। उनके अनुसार, सुपरस्टार ने कई मौकों पर इस इच्छा का जिक्र किया, लेकिन तलाक नहीं हो सका। अनीता का कहना है कि दोनों लंबे समय तक अलग रहने के बावजूद कानूनी रूप से पति-पत्नी बने रहे।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी बातें अनीता आडवाणी के व्यक्तिगत दावे हैं। डिंपल कपाड़िया की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तलाक को लेकर क्या लगाया दावा?
अनीता आडवाणी ने यह भी आरोप लगाया कि डिंपल कपाड़िया ने तलाक के बदले कुछ शर्तें रखी थीं। उन्होंने दावा किया कि संपत्ति से जुड़ी मांगों के कारण तलाक की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही इससे जुड़े किसी आधिकारिक दस्तावेज का उल्लेख किया गया है।
राजेश खन्ना और डिंपल की शादी
राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया ने साल 1973 में शादी की थी। दोनों की दो बेटियां ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना हैं। शादी के कुछ वर्षों बाद दोनों के रिश्तों में दूरियां आ गईं और 1982 के आसपास वे अलग रहने लगे। इसके बावजूद उन्होंने कभी आधिकारिक तौर पर तलाक नहीं लिया।
अनीता आडवाणी और कोर्ट का मामला
राजेश खन्ना के निधन के बाद अनीता आडवाणी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपने लिव-इन रिश्ते को वैध विवाह का दर्जा देने की मांग की थी। लेकिन 1 अप्रैल 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। अदालत ने उनके लिव-इन संबंध को कानूनी विवाह के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया।
फिर चर्चा में आई सुपरस्टार की जिंदगी
राजेश खन्ना की निजी जिंदगी हमेशा से लोगों की दिलचस्पी का विषय रही है। अनीता आडवाणी के हालिया दावों ने एक बार फिर उनके रिश्तों को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक पक्ष द्वारा नहीं की गई है, इसलिए इन्हें केवल अनीता आडवाणी के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

