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बुधवार, सितम्बर 9, 2026
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KBC 18: क्यों अमिताभ बच्चन के लिए होस्टिंग करना हो जाता है मुश्किल,जाने बताई क्या बात

KBC 18: ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का मंच सिर्फ सवाल-जवाब और करोड़पति बनने के सपनों तक सीमित नहीं है। हॉट सीट पर पहुंचने वाले कई कंटेस्टेंट्स अपनी जिंदगी के ऐसे अनुभव भी साझा करते हैं, जिन्हें सुनना बेहद भावुक कर देने वाला होता है। KBC 18 की होस्टिंग के दौरान अमिताभ बच्चन भी कुछ ऐसी ही परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।

शो के 18वें सीजन के साथ अमिताभ बच्चन एक बार फिर दर्शकों के बीच लौटे हैं। लेकिन इस सीजन में कंटेस्टेंट्स की कुछ संघर्षपूर्ण कहानियों ने उन्हें अंदर तक प्रभावित किया है।

‘होस्टिंग आगे बढ़ाना भी मुश्किल हो जाता है’

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में KBC 18 के अनुभव को ‘हार्ट-ब्रेकिंग एक्सपीरियंस’ बताया। उन्होंने लिखा कि हॉट सीट पर आने वाले कुछ कंटेस्टेंट्स की जिंदगी की कहानियां इतनी गंभीर और दुखद होती हैं कि उनके प्रति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता है।

बिग बी के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में सिर्फ भावनाओं को संभालना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि कैमरे के सामने शो की होस्टिंग को उसी तरह आगे बढ़ाना भी कठिन हो जाता है।

उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी साझा करने से इनकार किया। उनका कहना था कि ऐसा करने से चैनल और होस्ट की भूमिका से जुड़े कुछ पहलू सामने आ सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि यह अनुभव उनके लिए बेहद भावुक और दिल तोड़ने वाला रहा।

फैसलों को लेकर भी कही बड़ी बात

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में जिंदगी और फैसलों को लेकर भी अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि आसपास के लोग अक्सर अपनी राय और सुझाव देते हैं और उनकी नीयत अच्छी होती है, लेकिन आखिरकार सबसे बेहतर फैसले इंसान खुद लेता है।

अपने चिर-परिचित हल्के-फुल्के अंदाज में बिग बी ने यह भी लिखा कि उन्हें अगले दिन जल्दी काम पर जाना है, इसलिए वह अपनी पोस्ट को छोटा रख रहे हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि फैसले आखिर उनके ही होंगे।

KBC 18 में ‘सोचकर जवाब देने’ पर जोर

KBC 18 के नए फॉर्मेट में भी सोच-समझकर फैसला लेने की थीम पर जोर दिया गया है। शो के प्रोमो में अमिताभ बच्चन ने गोल्फ के जरिए जिंदगी का उदाहरण देते हुए बताया कि हर परिस्थिति में जल्दबाजी सही नहीं होती।

इस सीजन का संदेश है कि किसी सवाल का जवाब देने से पहले थोड़ा रुककर परिस्थितियों को समझना जरूरी है। यानी इस बार सिर्फ जवाब नहीं, बल्कि ‘सोचना पड़ेगा।’

 

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