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गुरूवार, सितम्बर 17, 2026
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Shabana Azmi Birthday: पहली फिल्म से ही बनी पहचान, उसके बाद लगातार तीन साल नेशनल अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास,

Shabana Azmi Birthday: शबाना आजमी का जन्म 18 सितंबर 1950 को मशहूर शायर कैफी आजमी और थिएटर कलाकार शौकत आजमी के घर हुआ। साहित्य और थिएटर के माहौल में पली-बढ़ीं शबाना ने अभिनय की औपचारिक शिक्षा FTII, पुणे से हासिल की और गोल्ड मेडल भी जीता।साल 1974 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘अंकुर’ से उन्होंने फिल्मों में कदम रखा। फिल्म में उन्होंने लक्ष्मी का किरदार निभाया था। यह डेब्यू ही उनके लिए बड़ी उपलब्धि लेकर आया और उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।

लगातार तीन साल नेशनल अवॉर्ड जीतने का रिकॉर्ड

‘अंकुर’ के बाद शबाना आजमी ने कई गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। ‘अर्थ’, ‘खंडहर’ और ‘पार’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली।

उन्हें 1982 में ‘अर्थ’, 1983 में ‘खंडहर’ और 1984 में ‘पार’ के लिए लगातार तीन बार बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। इसके बाद 1999 में ‘गॉडमदर’ के लिए भी उन्हें यह सम्मान मिला। इस तरह उनके नाम कुल पांच नेशनल फिल्म अवॉर्ड दर्ज हैं।

पैरेलल सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में पहचान

शबाना आजमी ने अपने करियर में केवल एक तरह की फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। ‘अंकुर’, ‘अर्थ’, ‘खंडहर’, ‘पार’ और ‘मंडी’ जैसी फिल्मों में उन्होंने कहानी और किरदार केंद्रित भूमिकाएं निभाईं।

इसके साथ ही उन्होंने मुख्यधारा की फिल्मों में भी काम किया। यही विविधता उनके लंबे फिल्मी सफर की एक खास पहचान रही है।

जावेद अख्तर से शादी

शबाना आजमी ने 1984 में लेखक और गीतकार जावेद अख्तर से शादी की। दोनों ने अपने-अपने क्षेत्रों में लंबे समय तक काम किया है। शबाना के शुरुआती जीवन में साहित्य और थिएटर का प्रभाव रहा, जिसे उनके अभिनय करियर में भी देखा गया।

फिल्मों के साथ सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय

शबाना आजमी का जुड़ाव सामाजिक मुद्दों से भी रहा है। वह महिलाओं के अधिकार, झुग्गी-बस्ती में रहने वाले लोगों और एड्स जागरूकता जैसे विषयों से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेती रही हैं। वह 1997 से 2003 तक राज्यसभा की मनोनीत सदस्य भी रही थीं।

2026 में दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पहुंचीं

जुलाई 2026 में शबाना आजमी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन में शामिल हुईं। 20 जुलाई को वह ‘चालो संसद’ मार्च में भी शामिल हुईं, जहां छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

मार्च के दौरान शबाना आजमी ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जोड़ते हुए अपनी बात रखी थी। बाद में उन्होंने मीडिया से बातचीत में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर भी अपने अनुभव साझा किए। ये उनके व्यक्तिगत प्रत्यक्षदर्शी बयान थे।

 

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