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बुधवार, अगस्त 19, 2026
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Sonia Gandhi Book Release: सोनिया गांधी की नई किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ में जानिए उनके निजी जिंदगी से राजनीति तक का सफर

Sonia Gandhi Book Release: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की नई किताब Belonging: A Journey of Love 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। 544 पन्नों की यह किताब उनके निजी जीवन, परिवार, भारत आने की कहानी और लंबे राजनीतिक सफर पर आधारित है। किताब में सोनिया गांधी ने अपनी जिंदगी के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को अपने नजरिए से पेश किया है।

इस किताब का प्रकाशन अल्फ्रेड ए. नोपफ करेगा, जो पेंगुइन रैंडम हाउस से जुड़ा प्रकाशन संस्थान है। इसमें इटली में सोनिया के बचपन से लेकर भारत आने और गांधी परिवार का हिस्सा बनने तक की कहानी शामिल है।

कैम्ब्रिज में हुई राजीव गांधी से पहली मुलाकात

किताब की कहानी 1965 के कैम्ब्रिज से शुरू होती है। उस समय 19 वर्षीय सोनिया माइनो पढ़ाई के लिए इंग्लैंड में थीं। यहीं उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। यह मुलाकात धीरे-धीरे प्रेम और फिर शादी में बदल गई।

भारत आने के बाद सोनिया ने भारतीय जीवनशैली को अपनाया। उन्होंने हिंदी सीखी, साड़ी पहनना और भारतीय खान-पान को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया।

इंदिरा गांधी और परिवार के मुश्किल दौर

‘Belonging’ में इंदिरा गांधी के साथ सोनिया गांधी के रिश्ते और गांधी परिवार के साथ उनके अनुभवों का भी जिक्र है। किताब में संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत और 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद परिवार पर पड़े प्रभाव को भी शामिल किया गया है।

इसके बाद राजीव गांधी राजनीति में आए और देश के प्रधानमंत्री बने। सोनिया ने उस दौर को भी अपने नजरिए से किताब में दर्ज किया है।

राजीव गांधी की हत्या के बाद बदली जिंदगी

किताब में राजीव गांधी की 1991 में श्रीपेरंबदूर में हुई हत्या का भी विस्तृत उल्लेख है। चुनाव प्रचार के दौरान हुए आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मौत के बाद सोनिया की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। इस घटना और उसके बाद के संघर्षों को भी किताब में जगह मिली है।

राजनीति में आने से लेकर 2004 तक का सफर

राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। बाद में उन्होंने कांग्रेस की कमान संभाली और लंबे समय तक पार्टी अध्यक्ष रहीं।

उनके राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित फैसला 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करना था। कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

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