Entertainment News: मुंबई में एक्टर बनने का सपना लेकर हर साल हजारों लोग पहुंचते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही लोग लंबे समय तक अपने सपने के लिए संघर्ष कर पाते हैं। अभिनेता सुविंदर विक्की भी ऐसे ही कलाकार हैं, जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए वर्षों तक मेहनत की।
सुविंदर ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह करीब 5 हजार रुपये लेकर मुंबई आए थे। थिएटर में काम करके मिले इन्हीं पैसों के सहारे उन्होंने मायानगरी में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत करने की कोशिश की। हालांकि, मुंबई जैसे महंगे शहर में यह रकम ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी और करीब एक महीने बाद उन्हें पंजाब वापस लौटना पड़ा।
छोटे किरदारों से शुरू हुआ सफर
पंजाब लौटने के बाद भी सुविंदर विक्की ने एक्टिंग का सपना नहीं छोड़ा। उन्होंने पंजाबी फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाने शुरू किए। साल 2004 में उन्होंने फिल्म ‘देस होया परदेस’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा।
इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में सपोर्टिंग और कैरेक्टर रोल किए। शाहिद कपूर की ‘उड़ता पंजाब’ और अक्षय कुमार की ‘केसरी’ जैसी फिल्मों में भी वह नजर आए। हालांकि, इन फिल्मों में काम करने के बावजूद उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जिसकी उन्हें लंबे समय से तलाश थी।
एक्टिंग छोड़ने का ख्याल भी नहीं आया
सुविंदर ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष और एक्टिंग के प्रति जुनून को याद करते हुए कहा कि अभिनय उनके लिए सिर्फ 9 से 5 की नौकरी नहीं है। उनके परिवार में नौकरी या खेती को करियर के सामान्य विकल्प के तौर पर देखा जाता था, लेकिन सुविंदर का मन हमेशा एक्टिंग में लगा रहा।
उन्होंने बताया कि एक्टिंग के अलावा कुछ और करने के बारे में सोचने मात्र से उन्हें बेचैनी महसूस होती थी। यही जुनून उन्हें लगातार छोटे-बड़े रोल करने और इंडस्ट्री में बने रहने के लिए प्रेरित करता रहा।
‘कोहरा’ ने बदली जिंदगी
सुविंदर विक्की के करियर में असली बदलाव नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘कोहरा’ के बाद आया। सीरीज में उनके ग्रे शेड वाले किरदार को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस भूमिका ने उन्हें ओटीटी की दुनिया में अलग पहचान दिलाई।
‘कोहरा’ के बाद उन्हें फिल्मों और वेब प्रोजेक्ट्स में भी काम मिलने लगा। इसके बाद उन्होंने ‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल के पिता का किरदार भी निभाया।
50 की उम्र के बाद मिला वह मुकाम
सुविंदर विक्की की कहानी उन कलाकारों के लिए प्रेरणा है, जो लंबे समय तक संघर्ष करने के बावजूद हार नहीं मानते। कई वर्षों तक छोटे किरदार निभाने के बाद उन्हें 50 की उम्र के बाद वह पहचान मिली, जिसका उन्होंने कभी सपना देखा था।
अब ‘आवारापन 2’ में उनके अभिनय की चर्चा हो रही है। फिल्म के जरिए सुविंदर एक बार फिर दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि इंडस्ट्री में सफलता पाने की कोई तय उम्र नहीं होती—कभी-कभी सालों का संघर्ष ही अचानक बड़ी पहचान में बदल जाता है।

