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Sunday, March 22, 2026
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CBSE बोर्ड की नई पहल,अब लड़कियों के लिए बनेगा हर स्कूल में एक Menstrual हेल्थ सेंटर

 CBSE Board: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सभी संबद्ध स्कूलों में मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य लड़कियों के लिए स्कूलों में एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया कदम

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को दिए गए फैसले में स्पष्ट किया था कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और सुविधाएं हर लड़की का मौलिक अधिकार हैं। अदालत के अनुसार, यदि स्कूलों में ये सुविधाएं नहीं होंगी तो इसका सीधा असर छात्राओं की पढ़ाई, आत्मविश्वास और सामाजिक जीवन पर पड़ेगा।

 

मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर में क्या होगा

इन सेंटरों में छात्राओं के लिए कई जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

सैनिटरी नैपकिन, जरूरत पड़ने पर छात्राएं आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
साफ-सफाई, नियमित सफाई और हाइजीन पर खास ध्यान।
सुरक्षित निपटान, इस्तेमाल किए गए नैपकिन का सुरक्षित निपटान।
MHM कॉर्नर,कुछ स्कूलों में हेल्थ कॉर्नर बनाया जाएगा, जहाँ मासिक धर्म और प्यूबर्टी से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।इस तरह के सेंटर न सिर्फ सुविधा देंगे, बल्कि छात्राओं को मानसिक सहजता और आत्मविश्वास भी देंगे।

जागरूकता और शिक्षा पर जोर

स्कूलों को छात्रों में जागरूकता भी बढ़ानी होगी।हेल्थ सेशन और वर्कशॉप: मासिक धर्म, प्यूबर्टी एजुकेशन और जेंडर सेंसिटिव चर्चाओं पर सत्र। छात्राओं को मासिक धर्म के बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रेरित करना।इन पहलों से लड़कियों में स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और समाज में लंबे समय से चली आ रही झिझक धीरे-धीरे कम होगी।

स्कूलों के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम

CBSE ने सभी स्कूलों के लिए एक रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया है। पहली रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक, और दूसरी 30 अप्रैल 2026 तक जमा करनी होगी।ऑनलाइन गूगल फॉर्म: रिपोर्ट केवल आधिकारिक गूगल फॉर्म के जरिए स्वीकार की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

लड़कियों के लिए सुरक्षित माहौल

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ सुविधाएं देना नहीं है, बल्कि स्कूलों में ऐसा माहौल तैयार करना है जहाँ लड़कियां बिना डर या शर्म के अपनी जरूरतों के बारे में बात कर सकें।आज भी कई जगह मासिक धर्म को लेकर संकोच और झिझक बनी हुई है। CBSE की यह पहल समाज में सोच बदलने और लड़कियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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