spot_img
Thursday, May 7, 2026
-विज्ञापन-

More From Author

Okta Identity 25: मेरठ के दीपांकर सक्सेना का वैश्विक सम्मान, ‘Okta Identity 25’ में बने इकलौते भारतीय

Okta Identity 25:Deepankar Saxena ने साइबर अपराध और डीपफेक आधारित ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ तकनीकी समाधान विकसित कर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। मेरठ के मूल निवासी दीपांकर सक्सेना को वर्ष 2026 की प्रतिष्ठित Okta Identity 25 सूची में शामिल किया गया है। डिजिटल आइडेंटिटी और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दुनिया के 25 विशेषज्ञों की इस सूची में इस साल दीपांकर एकमात्र भारतीय हैं।

यह प्रतिष्ठित सूची 4 मई को Times Square में जारी की गई, जहां सभी चयनित विशेषज्ञों का वीडियो प्रदर्शन भी किया गया। यह सम्मान डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों का प्रमाण माना जा रहा है।

डीपफेक फ्रॉड रोकने वाली तकनीक का मिला पेटेंट

वर्तमान में दीपांकर अमेरिका की Socure Inc. में जीएम और हेड ऑफ प्रोडक्ट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रमाणीकरण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण तकनीकी समाधान विकसित किए हैं। इसी वर्ष उन्हें डीपफेक और एआई आधारित फ्रॉड को रोकने वाली तकनीक के लिए अमेरिका का पेटेंट भी मिला है।

उनकी विकसित तकनीक मोबाइल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन को अधिक सुरक्षित बनाती है। यह तकनीक मोबाइल डिवाइस के वाइब्रेशन और एक्सेलेरोमीटर डेटा का विश्लेषण कर यह पहचानने में सक्षम है कि डॉक्यूमेंट की इमेज असली है या उसमें डिजिटल छेड़छाड़ की गई है।

मेरठ से अमेरिका तक का सफर

दीपांकर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मेरठ के डीएमए प्रथम मोदीपुरम से पूरी की। वर्ष 2009 में उन्होंने 10वीं और 2011 में 12वीं पास की। इसके बाद VIT University से सूचना प्रौद्योगिकी में बीटेक की डिग्री हासिल की।

करियर की शुरुआत उन्होंने Zoho Corporation, चेन्नई से की, जहां उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर मात्र तीन वर्षों में टेक लीड का पद हासिल किया।

डिजिटल पहचान को बना रहे सुरक्षित और आसान

दीपांकर का मानना है कि डिजिटल पहचान केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह लोगों के जीवन से जुड़ा एक संवेदनशील और मानवीय विषय है। अमेरिका पहुंचने के शुरुआती दिनों में पहचान और क्रेडिट हिस्ट्री की कमी के कारण उन्हें बैंक खाता खोलने और किराए पर घर लेने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

भविष्य की डिजिटल सुरक्षा का नया मॉडल

दीपांकर का मानना है कि भविष्य में डिजिटल पहचान प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें लोगों को बार-बार दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत न पड़े और वे केवल आवश्यक जानकारी ही साझा करें। मोबाइल ड्राइविंग लाइसेंस, वेरिफाएबल क्रेडेंशियल्स और वॉलेट आधारित आइडेंटिटी सिस्टम को वे डिजिटल सुरक्षा का अगला बड़ा कदम मानते हैं।

Latest Posts

-विज्ञापन-

Latest Posts