Microplastic Alert: माइक्रोप्लास्टिक प्लास्टिक के बेहद छोटे कण होते हैं, जिनका आकार पांच मिलीमीटर या उससे कम होता है। ये प्लास्टिक की बोतलों, पैकेजिंग, डिस्पोजेबल सामान, सिंथेटिक कपड़ों और अन्य प्लास्टिक उत्पादों के टूटने या घिसने से बनते हैं। ये कण हवा, पानी और भोजन के जरिए मानव शरीर तक पहुंच सकते हैं, इसलिए अब इन्हें केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय माना जा रहा है।
शरीर पर क्या हो सकता है असर?
मोहाली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों की एक स्टडी के अनुसार, सिंगल-यूज पीईटी बोतलों से निकलने वाले नैनोप्लास्टिक शरीर के महत्वपूर्ण जैविक तंत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययन में पाया गया कि ये कण आंतों के लाभकारी बैक्टीरिया, रक्त कोशिकाओं और एपिथेलियल कोशिकाओं के सामान्य कार्य को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर अभी और शोध जारी है।
लोगों में बढ़ रही जागरूकता
स्टडी सामने आने के बाद कई लोग प्लास्टिक के उपयोग को लेकर सतर्क हो रहे हैं। कुछ लोगों ने बताया कि अब वे प्लास्टिक की बोतलों की जगह स्टील या कांच की बोतलों का इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे। वहीं, डिस्पोजेबल कप और प्लास्टिक पैकेजिंग के उपयोग को भी कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जहां तक संभव हो, प्लास्टिक की बोतलों, कंटेनरों और डिस्पोजेबल कपों का उपयोग कम करें। गर्म चाय, कॉफी या पानी प्लास्टिक के बर्तनों में लेने से बचें। घर और ऑफिस में स्टील या कांच के बर्तनों का इस्तेमाल बेहतर विकल्प माना जाता है। साथ ही सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करना भी माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क को घटाने में मदद कर सकता है।

