Jaggery Benefits: खाने के बाद कुछ मीठा खाने की इच्छा हो तो कई भारतीय घरों में गुड़ एक पारंपरिक विकल्प रहा है। गन्ने के रस से तैयार गुड़ में रिफाइंड चीनी की तुलना में कुछ खनिज और अन्य पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं। इसे रोटी, चना, मूंगफली और तिल के साथ भी खाया जाता है।
हालांकि गुड़ को हेल्दी स्वीटनर समझकर ज्यादा मात्रा में खाना सही नहीं है। इसमें भी शुगर और कैलोरी होती है। इसलिए संतुलित मात्रा में इसका सेवन ज्यादा उचित है।
आयरन का कुछ मात्रा में स्रोत
गुड़ में थोड़ी मात्रा में आयरन पाया जाता है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि आयरन की कमी होने पर सिर्फ गुड़ के जरिए इसकी भरपाई करना सही तरीका नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और उचित आहार जरूरी है।भोजन के बाद गुड़ खाने की परंपरा कई परिवारों में रही है। कुछ लोग इसे पाचन के लिए उपयोगी मानते हैं। हालांकि गुड़ पाचन संबंधी बीमारी का इलाज नहीं है। पर्याप्त पानी, फाइबर और संतुलित भोजन पाचन स्वास्थ्य के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
जल्दी ऊर्जा दे सकता है
गुड़ में कार्बोहाइड्रेट और शुगर मौजूद होती है, इसलिए इसे खाने से शरीर को जल्दी ऊर्जा मिल सकती है। शारीरिक गतिविधि के बाद थोड़ी मात्रा में यह ऊर्जा का स्रोत बन सकता है। लेकिन ज्यादा सेवन से अतिरिक्त शुगर और कैलोरी बढ़ सकती है।गुड़ में पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे खनिजों की कुछ मात्रा मिल सकती है। फिर भी इसे इन पोषक तत्वों का प्रमुख स्रोत नहीं माना जाना चाहिए। फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और नट्स ज्यादा महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
तिल, चना और मूंगफली के साथ पारंपरिक स्नैक
गुड़ को तिल, मूंगफली और चने के साथ खाने की परंपरा रही है। गुड़ से बने लड्डू और चिक्की ऊर्जा देने वाले स्नैक हो सकते हैं। हालांकि इनमें कुल कैलोरी अधिक हो सकती है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।कुछ व्यंजनों और पेय में सफेद चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कितना गुड़ खाना बेहतर?
गुड़ को डाइट का छोटा हिस्सा रखना बेहतर है। डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को गुड़ की मात्रा तय करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।गुड़ भी मुख्य रूप से शुगर ही है, इसलिए इसे बिना सीमा वाला हेल्दी स्वीटनर नहीं समझना चाहिए।

