Sprint Interval Exercise Benefits: व्यायाम को हमेशा से बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन अब एक नए अध्ययन ने इस बात पर रोशनी डाली है कि व्यायाम की अवधि से ज्यादा उसकी तीव्रता भी महत्वपूर्ण हो सकती है। अमेरिका की रॉकफेलर यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं के अध्ययन में पाया गया कि कुछ ही समय की तेज स्प्रिंट एक्सरसाइज शरीर में बड़े जैविक बदलाव ला सकती है।
अध्ययन में प्रतिभागियों ने 30 सेकेंड की तेज दौड़ के छह सेट किए। इसके तुरंत बाद रक्त में मौजूद प्रोटीन का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि करीब एक-चौथाई प्लाज्मा प्रोटीन में बदलाव आया।
स्प्रिंट इंटरवल एक्सरसाइज सबसे प्रभावी
‘सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन’ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, स्प्रिंट इंटरवल एक्सरसाइज (SIE) ने लगभग 25 प्रतिशत प्लाज्मा प्रोटीन को प्रभावित किया। इनमें रक्त वाहिकाओं के निर्माण, ऊतकों के पुनर्गठन, आंतों से जुड़े संकेतों और संभावित न्यूरो-रेगुलेशन से संबंधित प्रोटीन शामिल थे।
तुलना में 90 मिनट तक मध्यम गति से साइकलिंग करने पर कम प्रोटीन में बदलाव देखा गया। ट्रेडमिल पर मध्यम गति से दौड़ने का प्रभाव साइकलिंग से अधिक था, लेकिन तेज स्प्रिंट के मुकाबले यह भी कम रहा।
200 से ज्यादा मेटाबोलाइट्स में आया बदलाव
शोधकर्ताओं ने व्यायाम से प्रभावित प्रोटीन की तुलना यूके बायोबैंक के 53 हजार से अधिक लोगों के स्वास्थ्य डेटा से की। कई प्रोटीन हृदय और मेटाबॉलिक बीमारियों के कम जोखिम से जुड़े पाए गए। इनमें मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज जैसे विकार भी शामिल थे।
अध्ययन में स्प्रिंट एक्सरसाइज के बाद 200 से अधिक मेटाबोलाइट्स में बदलाव देखा गया। इसके अलावा रक्त वाहिकाओं की वृद्धि, ऊतक रिमॉडलिंग और हार्मोनल सिग्नलिंग से जुड़े प्रोटीन में भी तत्काल बदलाव सामने आया।
छोटी मेहनत, शरीर में लंबी प्रतिक्रिया
शोधकर्ताओं के अनुसार, व्यायाम के बाद रक्त में निकलने वाले प्रोटीन और मेटाबोलाइट्स यानी ‘एक्सरकाइन्स’ व्यायाम की तीव्रता के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को तुरंत हाई-इंटेंसिटी स्प्रिंट शुरू कर देना चाहिए। अपनी फिटनेस, उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्यायाम की तीव्रता तय करना जरूरी है।

