Murthal Dhaba: सोनीपत का मुरथल कभी सफेद मक्खन और देसी पराठों के लिए जाना जाता था, लेकिन पांच दशकों में इसकी पहचान काफी बदल गई है। आज यहां पारंपरिक स्वाद के साथ आधुनिक सुविधाओं का ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो इसे सिर्फ खाने की जगह नहीं बल्कि एक लोकप्रिय वीकेंड आउटिंग डेस्टिनेशन बना चुका है। क्यूआर कोड से ऑर्डर, टॉय ट्रेन और रोबोट से खाना परोसने जैसी सुविधाएं यहां के ढाबों को खास बनाती हैं।
परंपरा के साथ आधुनिकता का मेल
मुरथल के ढाबों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने अपने पुराने स्वाद को बरकरार रखते हुए आधुनिकता को अपनाया है। थीम-बेस्ड डाइनिंग, वाटर फाउंटेन, सेल्फी प्वाइंट और बड़े पार्किंग एरिया के साथ यहां परिवारों के लिए मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद हैं।
दिल्ली-एनसीआर के अलावा पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से आने-जाने वाले लोग भी यहां रुककर पराठों का स्वाद लेते हैं। यही वजह है कि मुरथल अब हरियाणा के प्रमुख फूड और आउटिंग स्पॉट में शामिल हो चुका है।
शाकाहारी खाने की खास पहचान
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब 50 साल पहले बाबा कलीनाथ ने मुरथल में मांस बेचने को लेकर चेतावनी दी थी। ढाबा संचालकों का दावा है कि इसके बाद यहां शाकाहारी भोजन की परंपरा मजबूत हुई। आज कई बड़े ढाबे पूरी तरह शाकाहारी खाना परोसने के लिए पहचाने जाते हैं।
अमरीक सुखदेव ढाबे की अलग पहचान
मुरथल के लोकप्रिय ढाबों में अमरीक सुखदेव का नाम प्रमुख है। यहां सामान्य दिनों में भी हजारों लोग भोजन करते हैं, जबकि वीकेंड और त्योहारों पर भीड़ और बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में ग्राहकों के कारण यहां राशन और अन्य खाद्य सामग्री की खपत भी काफी अधिक रहती है।
बच्चों के लिए भी खास आकर्षण
मुरथल में खाने के साथ बच्चों के मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया है। ‘मेरा गांव मेरा देश’ में हरियाणवी संस्कृति, ‘चौखी ढाणी’ में राजस्थानी माहौल और ‘मन्नत’ में पंजाबी अंदाज देखने को मिलता है। कुछ जगहों पर टॉय ट्रेन, झूले, बंजी जंपिंग और ऊंट की सवारी जैसी गतिविधियां भी उपलब्ध हैं।

