Cyber Security: WhatsApp दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल है और भारत में करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल रोजमर्रा की बातचीत के लिए करते हैं। हालांकि, अब साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक नए खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि भविष्य में साइबर अपराधी AI एजेंट्स की मदद से WhatsApp पर बड़े पैमाने पर स्पैम मैसेज भेजने की कोशिश कर सकते हैं।
AI ब्राउजर एजेंट्स बने चिंता की वजह
साइबर सिक्योरिटी कंपनी Zenity की एक स्टडी के अनुसार, OpenAI के AI-पावर्ड वेब ब्राउजर ‘Atlas’ का दुरुपयोग कर WhatsApp कॉन्टैक्ट्स को ऑटोमैटिक स्पैम मैसेज भेजे जा सकते हैं। यह रिसर्च अमेरिका के लास वेगास में आयोजित ब्लैक हैट साइबर सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में पेश की गई।
हालांकि रिसर्चर्स ने स्पष्ट किया कि WhatsApp के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन में कोई कमजोरी नहीं मिली। समस्या AI ब्राउजर एजेंट्स से जुड़ी है, जो यूजर की ओर से कई ऑनलाइन कार्य स्वतः कर सकते हैं।
20 से ज्यादा सुरक्षा कमजोरियों का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर्स ने OpenAI, Google, Microsoft, Anthropic और Perplexity के AI ब्राउजर टूल्स में 20 से अधिक संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान की। इनका फायदा उठाकर हमलावर यूजर की फाइलों तक पहुंच, पासवर्ड मैनेजर का नियंत्रण, ऑनलाइन खरीदारी और स्पैम कैंपेन जैसे काम कर सकते हैं।
Zenity के CTO माइकल बारगुरी ने कहा कि AI एजेंट्स पारंपरिक ब्राउजर सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं और इससे पुराने तरह के साइबर हमलों की वापसी का खतरा बढ़ गया है।
OpenAI ने दी प्रतिक्रिया
Zenity ने जनवरी 2026 में अपनी रिपोर्ट OpenAI के साथ साझा की थी। कंपनी ने बताया कि वह प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसे हमलों पर लगातार काम कर रही है और Atlas के लिए पहले ही सुरक्षा अपडेट जारी किए जा चुके हैं। साथ ही OpenAI ने घोषणा की है कि Atlas को 9 अगस्त 2026 को बंद कर दिया जाएगा और इसकी ब्राउजर क्षमताओं को नए ChatGPT ऐप में अधिक सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।
यूजर्स क्या करें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, AI आधारित ब्राउजर टूल्स को केवल विश्वसनीय स्रोतों से इस्तेमाल करें और अपने सभी ऑनलाइन अकाउंट्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्रिय रखें। इससे संभावित साइबर हमलों का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

