Trending News: अगर इस महीने आपका किराने का बिल पहले से ज्यादा आया है, तो इसकी वजह सिर्फ एक सामान नहीं है। चीनी, प्याज, दाल और खाने के तेल जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों पर एक साथ दबाव बना हुआ है। ऐसे में आम परिवारों के लिए महीने का बजट संभालना मुश्किल हो सकता है।
आने वाले दिनों में त्योहारों का सीजन भी शुरू होने वाला है। इस दौरान मिठाई और दूसरे खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है। अगर सप्लाई उसी हिसाब से नहीं बढ़ी, तो कई जरूरी सामान और महंगे हो सकते हैं।
चीनी के दाम ने बढ़ाई चिंता
चीनी की कीमतों में हाल के दिनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले एक सप्ताह में इसके दाम करीब 7 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं, जबकि एक महीने में लगभग 17 रुपये प्रति किलो तक का उछाल बताया जा रहा है। कुछ बाजारों में खुदरा कीमत 70 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन ड्यूटी फ्री चीनी आयात की मंजूरी दी है। इसके अलावा स्टॉक लिमिट जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
प्याज की कीमत भी बढ़ी
प्याज के दाम भी लगातार ऊपर जा रहे हैं। 21 अगस्त को इसका औसत खुदरा भाव करीब 40.79 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि एक सप्ताह पहले यह 36.56 रुपये था।
नई खरीफ फसल की आवक में देरी और कुछ इलाकों में बारिश के कारण बुआई प्रभावित होने से सप्लाई पर असर पड़ा है। सरकार बफर स्टॉक के जरिए बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
दाल और तेल पर भी नजर
अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दालों की कीमतों में पिछले महीने 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। कम बुआई और मौसम का जोखिम आगे कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
वहीं, खाने के तेल की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर पड़ रहा है। पाम ऑयल और सूरजमुखी तेल की सप्लाई को लेकर बनी वैश्विक चिंताओं के कारण घरेलू बाजार में भी कीमतें बढ़ी हैं।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
फिलहाल सरकार आयात, बफर स्टॉक और स्टॉक लिमिट जैसे कदमों के जरिए कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। लेकिन त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में अगर सप्लाई पर दबाव बना रहा, तो रसोई का बजट और बढ़ सकता है।
आम परिवारों के लिए चिंता सिर्फ आज की महंगाई नहीं, बल्कि आने वाले हफ्तों का खर्च है। चीनी, प्याज, दाल और तेल चारों की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर पूरे महीने के घरेलू बजट पर पड़ना तय है।

