spot_img
Tuesday, April 7, 2026
-विज्ञापन-

More From Author

मेरी बेटी बोझ नहीं,तलाक के बाद घर लौटी बेटी के लिए ढोल बजा के पिता ने रच दी नई मिसाल

Meerut News: मेरठ की यह कहानी सच में दिल छू लेती है। आमतौर पर तलाक का नाम आते ही लोगों के चेहरे उतर जाते हैं, लेकिन यहां एक पिता ने अपनी बेटी की वापसी को खुशी के जश्न में बदल दिया। ढोल-नगाड़ों की आवाज, फूलों के हार और मुस्कुराते चेहरे,पूरा माहौल किसी शादी जैसा था। फर्क बस इतना था कि यह जश्न एक नई शुरुआत का था, जहां बेटी हारकर नहीं, बल्कि हिम्मत के साथ घर लौटी थी।

शादी से लेकर मुश्किलों तक

प्रणिता की शादी 14 दिसंबर 2018 को एक आर्मी मेजर से हुई थी। हर लड़की की तरह उसने भी खुशहाल जिंदगी के सपने देखे थे, लेकिन शुरुआत से ही चीजें ठीक नहीं रहीं। धीरे-धीरे ससुराल का माहौल उसके लिए भारी होता गया। मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तकलीफों ने उसकी जिंदगी मुश्किल बना दी। बेटे के जन्म के बाद भी हालात नहीं बदले, लेकिन उसने हिम्मत नहीं छोड़ी।

खुद के लिए लिया बड़ा फैसला

काफी सोचने और सहने के बाद प्रणिता ने अपने आत्मसम्मान को चुना और तलाक लेने का फैसला किया। 4 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने इस फैसले को मंजूरी दे दी। यह कदम आसान नहीं था, लेकिन जरूरी था। जब वह घर लौटी, तो उसके पिता ने उसे ऐसे अपनाया जैसे वह कोई जंग जीतकर आई हो—और सच में, वह जीत ही थी।

खुद मजबूत बनना है जरूरी

प्रणिता आज शास्त्री नगर की एक ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं और मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं। उन्होंने बहुत सादगी से कहा कि जिंदगी में सबसे जरूरी है खुद को मजबूत बनाना। अगर कोई भी महिला गलत व्यवहार झेल रही है, तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए। पढ़ाई और आत्मनिर्भरता ही असली ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि बेटियों की शादी से पहले उन्हें इतना मजबूत बनाओ कि वे खुद अपने फैसले ले सकें।

पिता का प्यार, बिना शर्त

उनके पिता की बात सबसे ज्यादा दिल को छू जाती है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी कोई सामान नहीं है, जिसे कहीं भेज दिया और जिम्मेदारी खत्म हो गई।” अगर वह खुश नहीं है, तो उसे वापस लाना उनका फर्ज है। उन्होंने किसी तरह का मुआवजा नहीं लिया, बस अपनी बेटी की मुस्कान को चुना।

एक सोच, जो बदल रही है

यह कहानी सिर्फ एक घर की नहीं, बल्कि सोच बदलने की शुरुआत है। यह याद दिलाती है कि बेटियां बोझ नहीं होतीं। उन्हें भी अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का पूरा हक है।और कभी-कभी, घर लौटना हार नहीं, सबसे बड़ी जीत होती है।

Latest Posts

-विज्ञापन-

Latest Posts