बेटे की खुशी में था परिवार, लेकिन अस्पताल ने थमा दी बेटी
यह मामला मुरादाबाद के करुला इलाके में स्थित मेडविन अस्पताल का है। रामपुर जिले के धमोरा गांव की रहने वाली रेनू यादव को 31 अक्टूबर को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दिन उन्होंने बेटे को जन्म दिया। परिवार में पहले से दो बेटियां थीं, इसलिए बेटे के जन्म से घर में खुशी का माहौल था।
इसी अस्पताल में रामपुर के बड़ा खास गांव की रहने वाली नाजमा ने भी एक बेटी को जन्म दिया था। दोनों परिवार अपने नवजात बच्चों के साथ अस्पताल में भर्ती थे।
छुट्टी के समय बदल गए दोनों नवजात
आरोप है कि रविवार देर रात करीब दो बजे अस्पताल के कर्मचारियों ने नाजमा के परिजनों को रेनू यादव का नवजात बेटा सौंप दिया। परिवार बच्चे को लेकर अपने गांव चला गया।
इसके अगले दिन सोमवार शाम जब रेनू की छुट्टी हुई तो अस्पताल कर्मचारियों ने उनके परिवार को नाजमा की नवजात बेटी दे दी। इस तरह अस्पताल में दोनों बच्चों की अदला-बदली हो गई।
दूसरे गांव से वापस लाया गया नवजात बेटा
मामले का पता चलने के बाद अस्पताल प्रबंधन रेनू के परिजनों को लेकर बड़ा खास गांव पहुंचा। वहां नाजमा के परिवार के पास मौजूद रेनू के बेटे को वापस लाया गया। इसके बाद दोनों नवजातों की पहचान कर उन्हें उनके वास्तविक माता-पिता को सौंप दिया गया।
स्टाफ नर्स की गई नौकरी, अस्पताल प्रबंधन ने मानी गलती
अस्पताल संचालक के मुताबिक, घटना के समय वह किसी जरूरी काम से लखनऊ गए हुए थे। उनकी गैरमौजूदगी में स्टाफ नर्स से यह गलती हुई। प्रबंधन ने संबंधित नर्स की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।
अस्पताल का दावा है कि दोनों परिवारों ने बच्चे वापस मिलने के बाद लिखित रूप में कोई शिकायत नहीं होने की बात कही है। हालांकि, इस घटना ने नवजातों की पहचान और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

