UP UCC Rules: उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बहस तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 अक्टूबर को कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद अगर बीजेपी की सरकार बनती है, तो यूपी में UCC लागू किया जाएगा। इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि कानून लागू होने पर शादी, तलाक और संपत्ति से जुड़े नियमों में क्या बदलाव आ सकते हैं। खासकर मुस्लिम समुदाय के मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों पर इसका क्या असर होगा?
अमित शाह ने क्या किया एलान?
लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने यूपी में UCC लागू करने की बात कही। हालांकि, यह घोषणा बीजेपी के दोबारा सत्ता में आने की स्थिति से जुड़ी है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में UCC लागू नहीं हुआ है और इसके संभावित कानून का मसौदा या अंतिम प्रावधान भी सार्वजनिक नहीं हैं।
शादी और निकाह के नियमों में क्या बदल सकता है?
इसका अंदाजा उत्तराखंड में लागू UCC से लगाया जा सकता है। वहां कानून के तहत किसी व्यक्ति के पहले से शादीशुदा होने पर दूसरी शादी की अनुमति नहीं है। विवाह की न्यूनतम उम्र पुरुषों के लिए 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल रखी गई है। शादी का पंजीकरण भी निर्धारित समय में कराना जरूरी है।
धार्मिक रीति-रिवाज से निकाह या विवाह समारोह करने पर रोक नहीं है, लेकिन विवाह की कानूनी शर्तें सभी समुदायों के लिए समान हो सकती हैं। उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई है।
तलाक और दोबारा शादी पर असर
उत्तराखंड के UCC में तलाक के लिए समान कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसके तहत विवाह को समाप्त करने के लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना होता है। इस तरह तलाक से जुड़े अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नियम लागू हो सकते हैं।
हालांकि, यूपी में तलाक और पुनर्विवाह को लेकर कौन-से प्रावधान होंगे, यह वहां बनने वाले कानून के अंतिम मसौदे से ही स्पष्ट होगा।
विरासत और लिव-इन संबंधों के नियम
उत्तराखंड के UCC में संपत्ति के उत्तराधिकार के लिए धर्म से अलग समान नियम बनाए गए हैं। इसके तहत कानूनी वारिसों के बीच संपत्ति के बंटवारे की व्यवस्था तय की गई है। वसीयत से जुड़े नियम भी इसी कानून का हिस्सा हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी उत्तराखंड में पंजीकरण का प्रावधान है। वहां ऐसे संबंधों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज कराना होता है। अगर यूपी में भी इसी तरह के प्रावधान शामिल किए जाते हैं, तो इसका असर लिव-इन में रहने वाले जोड़ों पर पड़ सकता है।
यूपी में कानून का इंतजार
फिलहाल उत्तराखंड का UCC केवल संभावित बदलावों को समझने का उदाहरण है। उत्तर प्रदेश में कानून लागू होने पर शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन से जुड़े वास्तविक नियम उसके विधेयक और अंतिम अधिनियम से ही तय होंगे।

