Child handwriting tips: बच्चों की लिखावट ठीक करना कई पेरेंट्स के लिए थोड़ा टेढ़ा काम लगता है। कभी लगता है बच्चा जल्दी सीख जाए, तो कभी उसकी गलतियों को देखकर चिंता भी हो जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही आता है,क्या पेंसिल से लिखवाएं या पेन से?आइए इसे बहुत आसान तरीके से समझते हैं।
शुरुआत हमेशा पेंसिल से ही करें
छोटे बच्चे जब लिखना शुरू करते हैं, तो उनका हाथ पूरी तरह तैयार नहीं होता। ऐसे में पेंसिल सबसे सही साथी बनती है।पेंसिल क्यों बेहतर है? बच्चे को पकड़ (ग्रिप) सही बनाने में मदद मिलती है, गलती होने पर मिटाकर फिर से लिख सकते हैं, इसलिए डर नहीं लगता,बच्चा आराम से सीखता है कोई दबाव महसूस नहीं करता, अक्षरों की शेप धीरे-धीरे बेहतर होती जाती है।पेंसिल बच्चे को सीखने की आज़ादी देती है।
पेन कब देना सही रहता है?
पेन जल्दी देने की गलती कई बार लिखावट खराब भी कर देती है। जब बच्चा बेसिक चीजें ठीक से सीख ले, तब पेन शुरू करना चाहिए।मतलब जब बच्चाअक्षर सही बना लेता हो,लाइन में लिखना समझ गया हो,शब्दों के बीच थोड़ा स्पेस रखना जानता हो,तभी पेन देना अच्छा रहता है। इससे लिखावट और ज्यादा साफ और कॉन्फिडेंट बनती है।
रोज़ की छोटी आदतें बड़ा फर्क लाती हैं
सिर्फ पेन-पेंसिल ही नहीं, कुछ छोटी बातें भी बहुत असर डालती हैं। बच्चे को सही तरीके से पेंसिल पकड़ना जरूर सिखाएं, कॉपी में लाइन का ध्यान रखें, इससे लिखावट सीधी बनती है, रोज़ सिर्फ 10–15 मिनट की प्रैक्टिस काफी है, बच्चे को जल्दी-जल्दी नहीं, आराम से लिखने के लिए कहें।अगर बच्चे की हैंडराइटिंग सुधारनी है, तो शुरुआत हमेशा पेंसिल से करें। जब बच्चा आत्मविश्वास के साथ लिखने लगे, तभी पेन दें।थोड़ा समय, थोड़ी प्रैक्टिस और सही तरीका बस यही मिलकर बच्चे की लिखावट को खूबसूरत बना देते हैं।

