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मंगलवार, सितम्बर 8, 2026
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महंगाई की मार से रसोई बेहाल,अंडा-चिकन और दूध के दामों ने आम आदमी को किया परेशान

Daily Expense Inflation: महंगाई का असर अब सिर्फ सब्जियों और अनाज तक सीमित नहीं है। आम आदमी की रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाले अंडे, चिकन और दूध की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक साल में पोल्ट्री और डेयरी उत्पादों के दाम करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़ने की बात सामने आ रही है। इसका सीधा असर परिवारों के महीने के बजट पर पड़ रहा है। खासकर उन घरों में जहां अंडे, दूध या चिकन नियमित रूप से खाने का हिस्सा हैं, वहां बढ़ते दामों के कारण खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है।

अंडे हुए महंगे

अंडे को लंबे समय से प्रोटीन का सस्ता और आसानी से उपलब्ध स्रोत माना जाता है, लेकिन अब इसकी कीमत भी लोगों की चिंता बढ़ा रही है। अलग-अलग बाजारों में पिछले एक साल के दौरान अंडे के दाम करीब 35 से 38.7 फीसदी तक बढ़ने की जानकारी सामने आ रही है। थोक बाजार में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। NECC के बाजार भाव में कई जगह 100 अंडों की कीमत 670 से 730 रुपये या उससे ऊपर पहुंच गई है। थोक कीमत बढ़ने का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे रहा है।

चिकन भी महंगा

अंडे के साथ चिकन की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। कई बाजारों में पिछले एक साल के दौरान चिकन के दाम करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़े हैं। कुछ खुदरा बाजारों में जिस चिकन की कीमत पहले करीब 220 रुपये प्रति किलो थी, वह अब बढ़कर 330 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। यानी एक किलो चिकन खरीदने के लिए लोगों को पहले की तुलना में काफी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। इसका असर नॉन-वेज खाने वाले परिवारों के साप्ताहिक और मासिक बजट पर पड़ रहा है।

दूध ने बढ़ाया खर्च

डेयरी उत्पाद भी महंगाई से अछूते नहीं रहे हैं। दूध की कीमत बढ़ने से पहले से खर्च संभाल रहे परिवारों पर अतिरिक्त दबाव आया है। देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने बढ़ती लागत का हवाला देते हुए दूध के दाम में करीब 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। इसके बाद कुछ इलाकों में प्रीमियम दूध की कीमत 68 से 70 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों के लिए छोटी दिखने वाली यह बढ़ोतरी महीने के हिसाब से बड़ा खर्च बन सकती है।

रसोई पर दबाव

अंडा, चिकन और दूध तीनों ही बड़ी संख्या में परिवारों की रोजमर्रा या नियमित जरूरत का हिस्सा हैं। इसलिए इनकी कीमत बढ़ने का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ता है। परिवार पहले से सब्जियों और दूसरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को देखते हुए खर्च में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में प्रोटीन और डेयरी से जुड़े जरूरी सामान महंगे होने पर रसोई का कुल खर्च और बढ़ सकता है।

कीमतों की वजह

पोल्ट्री और डेयरी उत्पादों की कीमत बढ़ने के पीछे उत्पादन लागत, पशु और पोल्ट्री चारा, परिवहन तथा दूसरे इनपुट खर्चों में बढ़ोतरी को अहम वजह माना जाता है। जब उत्पादन और सप्लाई की लागत बढ़ती है, तो उसका असर धीरे-धीरे थोक बाजार से खुदरा कीमतों तक पहुंचता है। अगर अंडे, चिकन और दूध के दामों में तेजी आगे भी बनी रहती है, तो आने वाले समय में आम परिवारों के मासिक किचन बजट पर दबाव और बढ़ सकता है।

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