9000 करोड़ रुपये तक पहुंचा बालों का कारोबार
भारत में इंसानी बालों का व्यापार काफी पुराना है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग बढ़ी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से इंसानी बालों और उनसे जुड़े उत्पादों का निर्यात करीब 94.8 करोड़ डॉलर यानी लगभग 8,000 से 9,000 करोड़ रुपये रहा।
इस कारोबार में कच्चे बालों के साथ-साथ प्रोसेस किए गए बाल और हेयर प्रोडक्ट भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में विग, हेयर एक्सटेंशन और हेयर पैच बनाने के लिए भारतीय बालों की अच्छी मांग रहती है।
घरों और सैलून से कैसे इकट्ठा होते हैं बाल?
आपके घर में कंघी करते समय निकलने वाले बाल भी इस कारोबार का हिस्सा बन सकते हैं। भारत में बाल मुख्य रूप से घरों, नाई की दुकानों और ब्यूटी सैलून से इकट्ठा किए जाते हैं।कई जगह बाल खरीदने वाले कारोबारी घर-घर जाकर भी इन्हें खरीदते हैं।
मंदिरों के बालों की क्यों होती है ज्यादा मांग?
भारत के कई मंदिरों में श्रद्धालु धार्मिक आस्था और मन्नत पूरी होने पर अपने बाल दान करते हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर इसका बड़ा उदाहरण है। यहां जमा होने वाले बालों की नीलामी की जाती है।
इनमें अच्छी गुणवत्ता वाले बाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी पसंद किए जाते हैं। रेमी हेयर की खासियत यह है कि इनमें बालों की प्राकृतिक दिशा और क्यूटिकल अलाइनमेंट बना रहता है। इससे तैयार होने वाले हेयर एक्सटेंशन और विग ज्यादा प्राकृतिक दिखाई देते हैं।
चीन तक कैसे पहुंचते हैं भारत के बाल?
भारत कच्चे और प्रोसेस किए गए बालों का बड़ा सप्लायर है, जबकि चीन हेयर प्रोडक्ट बनाने के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। चीन के शुचांग शहर में विग और हेयर एक्सटेंशन का बड़ा उद्योग मौजूद है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत से कच्चे बाल म्यांमार जैसे देशों के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचते हैं। कुछ कारोबारियों ने बालों की अवैध सप्लाई को लेकर भी आरोप लगाए हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
बालों से बनते हैं कई महंगे प्रोडक्ट
इंसानी बालों को साफ करने और प्रोसेस करने के बाद उनसे विग, हेयर एक्सटेंशन, हेयर पैच और अन्य ब्यूटी प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। इनका इस्तेमाल फैशन, हेयर स्टाइलिंग और बाल झड़ने की समस्या से परेशान लोगों द्वारा किया जाता है।इस तरह जो बाल हमें बेकार लगते हैं, वे दुनिया भर में एक बड़े कारोबार का हिस्सा हैं।

