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सोमवार, अगस्त 31, 2026
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War Against Drugs: पंजाब में नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान तेज, बच्चों में शुरुआती संकेत पहचानने पर जोर

War Against Drugs: पंजाब की भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत अब नशे की सप्लाई रोकने के साथ-साथ युवाओं में नशे की शुरुआती आशंका पहचानने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि समय रहते बच्चों और युवाओं को मदद मिल सके, ताकि प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ नशीले पदार्थों का सेवन आगे चलकर लत में न बदले।

व्यवहार में बदलाव हो सकता है शुरुआती संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार नशे की समस्या हमेशा किसी स्पष्ट संकेत के साथ सामने नहीं आती। बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव, पुराने दोस्तों से दूरी बनाना, नए लोगों के साथ अधिक समय बिताना, अत्यधिक गोपनीय रहना या पहले पसंद की जाने वाली गतिविधियों में रुचि खत्म होना चिंता का कारण हो सकता है।स्कूल से बार-बार शिकायतें आना, पढ़ाई में गिरावट और परिवार से दूरी बनाना भी ऐसे बदलाव हैं जिन पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए।

नींद और पैसों से जुड़े बदलाव भी महत्वपूर्ण

पूरी रात जागना, असामान्य समय पर सोना या दिनचर्या में अचानक बदलाव भी ध्यान देने योग्य हो सकता है। इसी तरह बिना स्पष्ट कारण बार-बार पैसे मांगना, खर्च का हिसाब न बताना या घर में पैसे गायब होना भी चिंता का संकेत हो सकता है।व्यक्तिगत स्वच्छता की उपेक्षा, भूख कम होना और खान-पान की आदतों में बदलाव भी संभावित चेतावनी संकेतों में शामिल हैं।

शारीरिक संकेतों पर भी रखें नजर

कुछ मामलों में आंखों का लाल या बुझा हुआ दिखना, अत्यधिक उनींदापन, लगातार थकान, बेचैनी, हाथ-पैर कांपना, बोलने में अस्पष्टता या शरीर के तालमेल में कमी जैसे शारीरिक बदलाव दिखाई दे सकते हैं।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक संकेत से नशीले पदार्थों के सेवन की पुष्टि नहीं की जा सकती। लगातार कई बदलाव एक साथ दिखाई देने पर ही स्थिति को गंभीरता से समझना चाहिए।

डांटने के बजाय करें बातचीत

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि देखभाल, संवेदनशीलता और संवाद के जरिए बच्चों को नशे की लत से बचाने में परिवार अहम भूमिका निभा सकता है।अभिभावक बच्चे को डांटने या धमकाने के बजाय शांत होकर उसकी बात सुनें। नशे का संदेह होने पर पुख्ता सबूत मिलने का इंतजार करना जरूरी नहीं है। समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

परिवार बन सकता है पहली सुरक्षा पंक्ति

सामाजिक दबाव या ‘लोग क्या कहेंगे’ की चिंता के कारण मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। बच्चे के व्यवहार में लगातार बदलाव दिखने पर परिवार को संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप करना चाहिए।समय पर संवाद, भरोसे का माहौल और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सहायता युवाओं को नशे की गंभीर समस्या से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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