Delhi में अप्रैल के आखिर तक तापमान तेजी से बढ़ने लगा है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भीषण गर्मी की आशंका जताई है। इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूलों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि बच्चों को हीटवेव के प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके।Rekha Gupta ने राजधानी के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को हीटवेव से निपटने की तैयारी मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
स्कूलों को क्यों देनी होगी कंप्लायंस रिपोर्ट?
सरकार चाहती है कि स्कूल सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर भी बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करें। इसी वजह से स्कूलों को यह जानकारी देनी होगी कि उन्होंने हीटवेव से बचाव के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं।
बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या बदलेगा?
सरकार ने स्कूलों को कई जरूरी निर्देश दिए हैं। सबसे पहले सभी स्कूलों में साफ और सुरक्षित पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा हर स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो हीटवेव से जुड़ी सावधानियों की निगरानी करेगा।
आउटडोर गतिविधियों पर रोक
दिल्ली सरकार ने फिलहाल स्कूलों को आउटडोर असेंबली कम करने या उसे इनडोर आयोजित करने की सलाह दी है। खेलकूद और धूप में होने वाली शारीरिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने को कहा गया है।इसका उद्देश्य बच्चों को लू, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं से बचाना है।
‘वॉटर बेल सिस्टम’ होगा लागू
इस बार स्कूलों में ‘वॉटर बेल सिस्टम’ लागू करने पर जोर दिया गया है। इसके तहत हर 45 से 60 मिनट के बीच बच्चों को पानी पीने के लिए छोटा ब्रेक दिया जाएगा।इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे नियमित रूप से पानी पीते रहें और शरीर में पानी की कमी न हो।
अभिभावकों को भी मिलेगी रोज जानकारी
सरकार ने अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने का फैसला लिया है। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए रोजाना हीटवेव एडवाइजरी और जरूरी जानकारी माता-पिता तक पहुंचाएं।
बच्चों को हीटवेव के प्रति किया जाएगा जागरूक
स्कूलों में छोटे-छोटे जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बच्चों को हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षणों के बारे में बताया जाएगा। साथ ही ‘बडी सिस्टम’ लागू किया जाएगा, ताकि बच्चे एक-दूसरे की सेहत पर नजर रख सकें।दिल्ली सरकार का मानना है कि बढ़ती गर्मी के बीच स्कूलों की जिम्मेदारी अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है,

