Loni Monkey Menace: गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। वनों के कटान और प्राकृतिक आवास कम होने के कारण भोजन की तलाश में बंदर अब रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले दो महीनों में बंदरों के हमले में 312 लोग घायल हो चुके हैं। लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में डर का माहौल है।
कई कॉलोनियों में लोगों की बढ़ी परेशानी
इंद्रापुरी, प्रशांत विहार, न्यू विकास नगर, टीला गांव, सिखरानी, शकलपुरा, भूपखेड़ी, धारीपुर, सिरौली और बेहटा समेत कई इलाकों में बंदरों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे और बुजुर्ग अब छतों, पार्कों और गलियों में जाने से भी डरने लगे हैं।
बंदरों के हमले से बढ़ा खतरा
निवासियों के अनुसार बंदर घरों की छतों पर उत्पात मचाते हैं, गमले तोड़ देते हैं और मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं से प्रसाद छीन लेते हैं। विरोध करने पर कई बार लोगों पर हमला कर देते हैं। कई लोग बंदरों से बचने के प्रयास में गिरकर घायल भी हुए हैं।
312 लोगों को लगानी पड़ी रैबीज वैक्सीन
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में लोनी के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 312 घायलों को रैबीज वैक्सीन दी गई। इनमें 50 शैय्या संयुक्त अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं।
नगरपालिका ने क्या कहा?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। वहीं नगरपालिका का कहना है कि बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को बंदरों को पकड़ने का काम सौंप दिया जाएगा।

