Bollywood News: बॉलीवुड में बड़े सितारों की लाइफस्टाइल और सुविधाएं अक्सर चर्चा में रहती हैं, लेकिन कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को कई बार अलग तरह के अनुभवों का सामना करना पड़ता है। अभिनेत्री सुनीता राजवार ने एक बातचीत के दौरान बताया कि सेट पर मुख्य कलाकारों और छोटे किरदार निभाने वाले कलाकारों के साथ व्यवहार में काफी फर्क दिखाई देता है।उनके मुताबिक, लीड एक्टर्स को बेहतर सुविधाएं, अलग कमरे और निजी स्टाफ मिलता है, जबकि छोटे रोल करने वाले कलाकारों को कई बार जरूरी सम्मान भी नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि कई बार स्पॉट बॉय तक सपोर्टिंग कलाकारों को गंभीरता से नहीं लेते।
चाय-कॉफी जैसी छोटी सुविधाओं के लिए भी करना पड़ता है इंतजार
अभिनेता जतिन नेगी ने भी फिल्म और टीवी सेट्स के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कई बार सपोर्टिंग कलाकारों के नाम तक याद नहीं रखे जाते और उन्हें सिर्फ स्क्रिप्ट में दिए गए किसी टैग से बुलाया जाता है।जतिन के अनुसार, कई मौकों पर छोटे कलाकारों को चाय, कॉफी या खाने जैसी बुनियादी सुविधाएं पाने में भी परेशानी होती थी। ऐसे माहौल में काम करने के बावजूद कलाकार अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करते रहते हैं।
महीनों बाद मिलती है मेहनत की कमाई
जतिन नेगी ने बॉलीवुड में पेमेंट सिस्टम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां बड़े सितारों को करोड़ों रुपये की फीस आसानी से मिल जाती है, वहीं कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को अपनी छोटी रकम के लिए भी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।कई बार कलाकारों को दिन के हिसाब से कुछ हजार रुपये मिलते हैं और दो-तीन दिन का काम करने के बाद भी उनकी पेमेंट दो से तीन महीने तक अटक जाती है।
फ्री में काम करवाने और फीस कम करने की कोशिश
सुनीता राजवार ने बताया कि इंडस्ट्री में कई बार कलाकारों को यह कहकर कम पैसे में या बिना फीस के काम करने के लिए मनाने की कोशिश की जाती है कि उन्हें बड़ा प्लेटफॉर्म मिल रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि पहले पेमेंट साइकिल करीब 45 दिनों की होती थी, जो धीरे-धीरे बढ़कर 60 और अब कई जगह 90 दिनों तक पहुंच गई है। कई मामलों में यह अवधि शूटिंग खत्म होने के बाद नहीं बल्कि प्रोजेक्ट के टेलीकास्ट के बाद गिनी जाती है।

