UP Women Voters: उत्तर प्रदेश में छह करोड़ से ज्यादा महिला मतदाता हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में उनका वोट निर्णायक माना जा रहा है। इसी को देखते हुए सरकार महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता देने की योजना पर मंथन कर रही है। इसके अलावा पहले से चल रही योजनाओं की राशि बढ़ाने और नई महिला केंद्रित योजना शुरू करने के विकल्प भी सामने हैं।
सामूहिक विवाह योजना में दोगुनी हुई सहायता
योगी सरकार पहले ही महिलाओं और बेटियों से जुड़ी कई योजनाओं में बदलाव कर चुकी है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सहायता राशि 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये की गई है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
पेंशन और कन्या सुमंगला पर भी फोकस
सरकार वृद्धावस्था, दिव्यांग और निराश्रित महिला पेंशन को बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने की तैयारी में है। वहीं, कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता और योजना के दायरे में भी बढ़ोतरी के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। मेधावी छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मुफ्त स्कूटर देने की घोषणा भी की जा चुकी है।
तीन करोड़ महिलाओं को SHG से जोड़ने का लक्ष्य
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तीन करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही एक करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
2027 में महिला वोट बन सकता है बड़ा फैक्टर
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की वापसी में महिला मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई थी। ऐसे में 2027 से पहले सरकार का फोकस सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सीधे आर्थिक लाभ पर भी हो सकता है। हालांकि, किसी नई योजना या खाते में सीधे रकम भेजने का अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।

