Somvati Amavasya 2026: वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 15 जून को सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए इस वर्ष सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है और इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है।
स्नान और पूजा का शुभ समय
सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है। यह समय सुबह 4 बजकर 3 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। यदि किसी कारणवश ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर सकें, तो सूर्योदय के बाद भी स्नान किया जा सकता है। इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा।
स्नान, दान और पूजा के लिए अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य करना लाभकारी माना जाता है।
बन रहे हैं खास योग और नक्षत्र
इस वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या पर शूल योग और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। शूल योग सुबह से लेकर 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इसके बाद गण्ड योग शुरू होगा, जो 16 जून की सुबह 4 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। वहीं मृगशिरा नक्षत्र शाम 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में पूजा और दान का विशेष फल प्राप्त होता है।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
सोमवती अमावस्या का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखकर शिव-पार्वती की आराधना करती हैं। मान्यता है कि इससे अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। पति-पत्नी यदि इस दिन एक साथ शिव-पार्वती की पूजा करें और कच्चे दूध, गंगाजल तथा काले तिल से अभिषेक करें, तो परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।
स्नान, दान और पितरों का आशीर्वाद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन किया गया स्नान मोक्ष देने वाला माना जाता है। ज्येष्ठ अधिकमास में पड़ रही इस अमावस्या पर जलदान का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अलावा वस्त्र, अन्न, फल, छाता और पंखा आदि का दान करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान भी किया जाता है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख, समृद्धि और उन्नति आती है।
(Disclaimer- यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. The Mid Post इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

