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गुरूवार, जुलाई 9, 2026
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योगिनी एकादशी 2026: तुलसी दल से लेकर मखाने की खीर तक, योगिनी एकादशी पर श्रीहरि को प्रिय हैं ये भोग

Yogini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए समर्पित है। वर्ष 2026 में यह पावन एकादशी 10 जुलाई, शुक्रवार को पड़ रही है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उन्हें प्रिय भोग अर्पित करते हैं। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। हालांकि ये सभी बातें धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं।

जानें योगिनी एकादशी की तिथि और शुभ समय

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई 2026 को सुबह 8:16 बजे शुरू होगी और 11 जुलाई 2026 को सुबह 5:22 बजे समाप्त होगी। हरि वासर का समापन 11 जुलाई को सुबह 10:32 बजे बताया गया है। उदया तिथि और अलग-अलग परंपराओं के अनुसार कुछ श्रद्धालु 10 जुलाई तो कुछ 11 जुलाई को व्रत एवं पूजा करेंगे।

भगवान विष्णु को कौन-से भोग अर्पित करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को सात्विक और शुद्ध भोजन अत्यंत प्रिय माना जाता है। योगिनी एकादशी पर उन्हें पंचामृत, तुलसी दल, मखाने की खीर, दूध, दही, घी, शहद, मिश्री और ताजे फल अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा नारियल और सूखे मेवे भी भोग में शामिल किए जा सकते हैं।

विशेष रूप से तुलसी दल को भगवान विष्णु की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। मान्यता है कि तुलसी के बिना उनकी पूजा अधूरी रहती है।

ऐसे करें भगवान श्रीहरि की पूजा

सुबह स्नान कर साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद पीले पुष्प, चंदन, अक्षत और तुलसी अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और श्रद्धा से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।

व्रत के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी केवल भोजन त्यागने का नहीं बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी पर्व है। इस दिन क्रोध, झूठ, विवाद और कटु वचन से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरतमंदों की सहायता, दान-पुण्य और सात्विक जीवनशैली अपनाना शुभ माना जाता है।

क्यों खास माना जाता है यह व्रत?

पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

 

(Disclaimer- यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. The Mid Post इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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