New Education Policy: देश में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे सेक्स एजुकेशन को अब स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि देशभर के स्कूलों में व्यापक सेक्स एजुकेशन लागू करने की योजना तैयार की जा रही है। सरकार ने कहा कि अदालत की मंजूरी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
यह जानकारी केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान दी।
पोक्सो कानून पर सुनवाई के दौरान उठा मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट किशोरों के आपसी सहमति वाले प्रेम संबंधों में पोक्सो (POCSO) कानून के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा था। अदालत ने टिप्पणी की कि कई मामलों में 16 से 18 वर्ष के किशोर आपसी सहमति से संबंध बनाकर घर छोड़ देते हैं, लेकिन बाद में परिजन सम्मान या सामाजिक दबाव के चलते आपराधिक मामले दर्ज करा देते हैं।
इसी मुद्दे के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 26 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी।
समिति ने दिए अहम सुझाव
समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा (Comprehensive Sex Education) और बच्चों को यौन शोषण से बचाव संबंधी विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पाठ्यक्रम को तैयार करने की जिम्मेदारी एनसीईआरटी (NCERT) को दी जानी चाहिए और इसे नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप लागू किया जाए।
प्राथमिक स्तर से पढ़ाने की सिफारिश
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि प्राथमिक कक्षाओं से ही प्रशिक्षित विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से इन विषयों की पढ़ाई शुरू की जाए। समिति ने सप्ताह में दो बार 20-20 मिनट की अनिवार्य कक्षाएं आयोजित करने की भी सिफारिश की है, ताकि बच्चों को उम्र के अनुरूप वैज्ञानिक और सही जानकारी मिल सके।
अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें
अब इस प्रस्ताव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। यदि अदालत सहमति देती है, तो आने वाले समय में देश के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन को औपचारिक रूप से पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है।

