PM Surya Ghar Yojana: बिजली के बढ़ते बिलों और सरकारी सब्सिडी योजनाओं के चलते देशभर में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि सोलर सिस्टम लंबे समय में बिजली खर्च कम करने में मदद करता है, लेकिन इसे लगवाने से पहले इसके कुछ नुकसान और सीमाओं को समझना भी जरूरी है। कई लोग केवल बिजली बचत को देखकर निवेश कर देते हैं, लेकिन बाद में उन्हें कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
शुरुआती लागत होती है काफी ज्यादा
रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने में अच्छी-खासी रकम खर्च होती है। सरकार सब्सिडी जरूर देती है, लेकिन इसके बाद भी पैनल, इन्वर्टर, बैटरी, वायरिंग और इंस्टॉलेशन की लागत मिलाकर शुरुआती निवेश काफी बड़ा हो सकता है। हर परिवार के लिए एकमुश्त इतनी राशि खर्च करना आसान नहीं होता।
हर मौसम में नहीं मिलती समान बिजली
सोलर पैनल पूरी तरह सूरज की रोशनी पर निर्भर होते हैं। बरसात, कोहरे या लगातार बादल छाए रहने पर बिजली उत्पादन कम हो जाता है। ऐसे समय में आपको ग्रिड बिजली या बैटरी बैकअप पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
निवेश की भरपाई में लग सकता है लंबा समय
सोलर सिस्टम से बिजली बिल कम जरूर होता है, लेकिन शुरुआती खर्च की भरपाई होने में कई साल लग सकते हैं। यदि आपके घर की बिजली खपत कम है या भविष्य में घर बदलने की योजना है, तो निवेश का पूरा लाभ मिलने में और अधिक समय लग सकता है।
मेंटेनेंस भी है जरूरी
सोलर पैनल को समय-समय पर साफ करना जरूरी होता है। धूल, पत्तियां और पक्षियों की गंदगी पैनल की कार्यक्षमता घटा सकती है। नियमित सफाई और समय-समय पर सिस्टम की जांच कराना बेहतर प्रदर्शन के लिए आवश्यक है।
छत पर पर्याप्त धूप होना जरूरी
यदि आपकी छत पर आसपास की ऊंची इमारतों, पेड़ों या अन्य बाधाओं की वजह से पर्याप्त धूप नहीं आती, तो सोलर पैनल अपेक्षित बिजली नहीं बना पाएंगे। ऐसी स्थिति में महंगा निवेश करने के बावजूद आपको पूरा फायदा नहीं मिल सकेगा।

