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गुरूवार, सितम्बर 3, 2026
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Bihar Teacher Award 2026:खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाने वाली निकिता भारती को मिला राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026

Bihar Teacher Award 2026: बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल करने वाली नवादा की प्रधान शिक्षिका निकिता भारती ने अपनी अलग पहचान बनाई है। वह खेल-खेल में पाठ समझाती हैं, कहानियों के जरिए विज्ञान के कठिन विषयों को आसान बनाती हैं और गीतों के माध्यम से बच्चों को गणित से जोड़ने का प्रयास करती हैं।

उनके इसी नवाचार और समर्पित शिक्षण कार्य को देखते हुए बिहार सरकार के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने उन्हें राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित किया है। शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर को उन्हें यह सम्मान दिए जाने की जानकारी है।

व्यवहारिक शिक्षा पर विशेष जोर

निकिता भारती का मानना है कि बच्चों की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसी सोच के साथ वह विद्यालय में व्यवहारिक और गतिविधि आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती हैं। उनका प्रयास रहता है कि बच्चे किसी विषय को केवल याद न करें, बल्कि उसे समझें और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ सकें।

पढ़ाई को सरल और आकर्षक बनाने के लिए वह शिक्षण-अधिगम सामग्री का इस्तेमाल करती हैं। खेल आधारित गतिविधियों और रचनात्मक प्रयोगों के जरिए बच्चों की कक्षा में भागीदारी बढ़ाने पर उनका विशेष ध्यान रहता है।

बच्चों की उपस्थिति और सहभागिता में सुधार

इन प्रयासों का असर विद्यालय के माहौल पर भी देखने को मिला। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी और उनकी सक्रियता में सुधार हुआ। विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ने के साथ अभिभावकों के बीच भी शिक्षिका के प्रति सम्मान बढ़ा।

निकिता का लक्ष्य सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है। वह विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास करती रही हैं।

2015 से सरकारी शिक्षा सेवा में योगदान

निकिता भारती ने वर्ष 2015 में नवादा के नगर मध्य विद्यालय से शिक्षिका के रूप में सेवा शुरू की थी। वर्ष 2025 तक उन्होंने वहीं कार्य किया। इसके बाद उन्हें नवादा सदर प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय शाहपुर की प्रधान शिक्षिका की जिम्मेदारी मिली।

नवादा नगर परिषद क्षेत्र के मिर्जापुर में पली-बढ़ीं निकिता को अपने माता-पिता मंजू कुमारी और अमरेंद्र नारायण वर्मा से शिक्षा के लिए प्रोत्साहन मिला। सरकारी स्कूल में सेवा देने के पीछे वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की उनकी इच्छा भी महत्वपूर्ण रही।

 

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